7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 149

134 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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ब्राह्मणवाद की विजय

राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को ‘दि ट्रम्फ ऑफ ब्राह्मेनिज्म’ (ब्राह्मणवाद की विजय) शीर्षक के अंतर्गत केवल तीन टंकित पृष्ठ प्राप्त हुए थे। सौभाग्यवश, निबंध की एक प्रति श्री एस.एस. रेगे ने दी, ताकि उसे अंगे्रजी की पुस्तक में सम्मिलित किया जा सके। इन पृष्ठों की जांच करते समय कमेटी के सदस्यों ने यह देखा कि श्री रेगे से जो प्रति प्राप्त हुई है, उसमें तीन से सात तक और नौ से सत्रह तक के पृष्ठ नहीं हैं। इस लेख के कुल टंकित पृष्ठों की संख्या बानवे थी, जिसमें लापता पृष्ठ भी सम्मिलित थे। श्री रेगे की प्रति पर ‘दि ट्रम्फ ऑफ ब्राह्मेनिज्म’ (ब्राह्मणवाद की विजय) शीर्षक दिया गया था, जब कि कमेटी को प्राप्त कागजों में पांडुलिपि के प्रथम पृष्ठ पर शीर्षक ‘रेजिसाइड और दि बर्थ ऑफ काउंटर-रिवोल्यूशन’ (राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म) दिया गया था। इस विषय का वर्गीकरण नौ अध्यायों में किया गया है और कमेटी को प्राप्त प्रति में इसका उल्लेख है, जब कि श्री रेगे की प्रति में यह लापता है। डॉ. अम्बेडकर की हस्तलिखित प्रति में शीर्षक और वर्गीकरण, दोनों का ही उल्लेख है। इसलिए उन्हें अंगे्रजी के प्रकाशन में यथावत रख लिया गया है। संयोगवश कमेटी को नौ से सत्रह तक के पृष्ठ किसी अन्य फाइल में बंधे प्राप्त हुए। इन सभी कागजों को अंगे्रजी प्रकाशन में यथोचित स्थान पर लगा दिया गया है। इस प्रकार पृष्ठ संख्याचार से सात के अतिरिक्त, यह पांडुलिपि पूर्ण है। कमेटी को प्राप्त प्रति में इस विषय के वर्गीकृत जिन नौ आध्यायों का उल्लेख है, वे हैंµ 1. दि ब्राह्मेनिक रिवोल्ट अगेन्स्ट बुद्धिज्म (बौद्ध धर्म के विरुद्ध ब्राह्मणवादी विद्रोह), 2. मनु दि एपोस्टिल ऑफ ब्राह्मेनिज्म (ब्राह्मणवाद के देवदूत मनु), 3. ब्राह्मेनिज्म एंड