7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 150

ब्राह्मणवाद की विजय

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दि ब्राह्मिन्स राइट टू रूल एंड रेजिसाइड (ब्राह्मणवाद तथा ब्राह्मण का शासन

करने का अधिकार और राजहत्या), 4. ब्राह्मेनिज्म एंड दि प्रिवीलेजज ऑफ

ब्राह्मिन्स (ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणों के विशेष अधिकार), 5. ब्राह्मेनिज्म एंड दि

क्रीएशन आफ कास्ट्स (ब्राह्मणवाद और जाति संरचना), 6. ब्राह्मेनिज्म एंड दि

डिगे्रडेशन ऑफ नॉन-ब्राह्मिन्स (ब्राह्मणवाद और गैर-ब्राह्मण लोगों का अधःपतन),

7. ब्राह्मेनिज्म एंड दि सपे्रशन ऑफ दि शूद्र (ब्राह्मणवाद और शूद्रों का दमन),

8. ब्राह्मेनिज्म एंड दि सबजेक्शन ऑफ वीमेन (ब्राह्मणवाद और महिलाओं की

पराधीनता), और 9. ब्राह्मेनिज्म एंड दि लीगेलाइजेशन ऑफ दि सोशल सिस्टम

(ब्राह्मणवाद और सामाजिक व्यवस्था का वैधीकरण) - संपादक

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भारत के विषय में बोलते हुए प्रो. ब्लूमफील्ड अपनी भाषण माला ‘वैदिक धर्म’ के प्रारंभ में अपने श्रोताओं को स्मरण कराते हैं कि ‘भारत कई अर्थों में अनेक धर्मों की भूमि है। इसने अपने स्वयं के संसाधन, अनेक अलग-अलग व्यवस्थाओं और पंथों को जन्म दिया है।

‘एक अन्य अर्थ में भारत अनेक धर्मों की भूमि है। अन्य किसी भी स्थान पर जीवन का तानाबाना धार्मिक विश्वासों और प्रथाओं से इतना अधिक अनुप्राणित नहीं मिलता।’ ख्1, .....

इस अभिमत में बहुत सच्चाई है। उन्होंने इस सच्चाई का कहीं अधिक गहन तथा सटीक बखान किया होता, यदि उन्होंने यह कहा होता कि भारत परस्पर विरोधी धर्मों की भूमि है। वास्तव में कोई भी ऐसा देश नहीं है जहां धर्म ने उसके इतिहास में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो, जैसी कि उसने भारत के इतिहास में निभाई है। भारत का इतिहास और कुछ नहीं, सिर्फ बौद्ध धर्म और ब्राह्मणवाद के बीच जातीय संघर्ष का इतिहास है। इस सत्य की इतनी अवहेलना की गई है कि कोई भी ऐसा नहीं मिलेगा जो इसे तुरंत स्वीकार कर ले। वास्तव में ऐसे कम व्यक्ति मिलेंगे जो इस प्रकार के अभिमत का खंडन कर सकें।

मैं यहां संक्षेप में भारतीय इतिहास के मुख्य-मुख्य तथ्यों को प्रस्तुत कर रहा हूं। यह इसलिए भी कि जिन लोगों ने भारत के इतिहास को कुछ भी समझा है, उनको यह जान लेना चाहिए कि यह इतिहास और कुछ नहीं है, बल्कि ब्राह्मणवाद और बौद्ध धर्म के बीच महत्ता के लिए संघर्ष का इतिहास है।

कहा जाता है कि भारत का इतिहास आर्यों के आगमन से प्रारंभ हुआ, जिन्होंने भारत

  1. दि रिलीजन ऑफ दि वेद, पृ. 1