136 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
पर आक्रमण किया, इसे अपना घर बनाया और अपनी संस्कृति स्थापित की। आर्य लोगों के गुण, उनकी संस्कृति, उनका धर्म तथा उनकी सामाजिक पद्धति कुछ भी क्यों न हो, परंतु हम उनके राजनीतिक इतिहास के बारे में बहुत कम जानते हैं। अनार्यों की तुलना में आर्यों की श्रेष्ठता के जो भी दावे पेश किए जाते हैं, उस सबके बावजूद यह तो निश्चित है कि आर्यों ने अपनी राजनीतिक उपलब्धियों के बारे में ऐसा कुछ नहीं कहा है, जो इतिहास का अंग बन सके। नागा नाम की अनार्य जाति के उत्थान से भारत के राजनैतिक इतिहास का प्रारंभ होता है, जो कि शक्तिशाली लोग थे, जिन्हें आर्य पराजित नहीं कर सके तथा जिनके साथ आर्यों ने शांति-समझौता किया और जिन्हें आर्यों को अपने समान ही मान्यता देने के लिए बाध्य होना पड़ा। भारत ने प्राचीन-काल में राजनीतिक क्षेत्र में जो भी ख्याति और गौरव अर्जित किया, उसका श्रेय पूर्णतः अनार्य नागाओं को जाता है। यही वे लोग हैं, जिन्होंने भारत को विश्व के इतिहास में महान और शानदार स्थान दिलाया।
भारत के राजनीतिक इतिहास में सर्वप्रथम युगांतरकारी घटना थी, बिहार में 642 ईसा पूर्व मगध साम्राज्य का उदय। कहा जाता है कि मगध साम्राज्य के संस्थापक का नाम शिशुनाग ख्1, था और यह नागा नामक अनार्य जाति का था।
शिशुनाग द्वारा स्थापित यह छोटा-सा मगध राज्य उसके वंश में उत्पन्न समर्थ शासकों के अधीन विशाल होता गया और बिम्बसार के अधीन तो यह एक साम्राज्य ही बन गया जो इस वंश में उत्पन्न पांचवां शासक था। यह राज्य मगध साम्राज्य कहा जाने लगा। शिशुनाग वंश ने 413 ईसा पूर्व तक शासन किया। उस समय शिशुनाग वंश के सम्राट महानंद का शासन था। इस सम्राट महानंद की नंद नाम के एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति ने हत्या कर दी और वह सम्राट बन बैठा। उसने नंद राजवंश की स्थापना की। इस नंद वंश ने मगध साम्राज्य पर 322 ईसा पूर्व तक शासन किया। इसके अंतिम सम्राट को चन्द्रगुप्त ने पदच्युत किया और उसने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। चन्द्रगुप्त शिशुनाग वंश के अंतिम सम्राट के परिवार से संबंधित था ख्2, । इसलिए कहा जा सकता है कि चन्द्रगुप्त ने जो क्रांति की, वह वस्तुतः मगध के नाग साम्राज्य की पुनर्स्थापना थी।
मौर्यों को जो मगध साम्राज्य मिला, उसकी सीमाएं उन्होंने अपने पराक्रम से काफी दूर-दूर तक फैलाई। अशोक के अधीन इस साम्राज्य की सीमा यहां तक बढ़ी कि इसे एक दूसरा ही नाम दिया जाने लगा। इसे मौर्य साम्राज्य या अशोक साम्राज्य कहा जाने लगा। (इसके आगे अंगे्रजी की मूल पांडुलिपि में पृ. चार से सात तक का अंश नहीं मिलता)।
उस समय जितने विभिन्न धर्म प्रचलित थे, यह उन जैसा नहीं रहा। अशोक ने इसे राजकीय धर्म घोषित किया। निश्चय ही यह ब्राह्मणवाद के लिए बहुत बड़ा आघात था।
इसे शिशुनाक भी कहा जाता है।
श्री हरिकृष्ण देव, स्मिथ द्वारा उल्लिखित, अर्ली हिस्ट्री आफ इंडिया (1924), पृ. 44 फुटनोट।