7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 152

ब्राह्मणवाद की विजय

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इससे ब्राह्मणों को राज्य का संरक्षण मिलना बंद हो गया। अशोक साम्राज्य में उन्हें गौण या अधीनस्थों का दर्जा दिया जाने लगा और उनकी उपेक्षा की जाने लगी। निश्चय ही कहा जा सकता है कि यह दमन इस छोटे से कारण से हुआ कि अशोक ने सभी प्रकार के पशुओं की बलि पर रोक लगा दी थी, जो ब्राह्मणवाद का मूल आधार थी। ब्राह्मणों को न केवल राज्य का संरक्षण मिलना बंद हुआ, बल्कि उनका व्यवसाय भी छिन गया। यह व्यवसाय था यज्ञ-कर्म कराना और उसके बदले शुल्क लेना, जो कभी-कभी बहुत अधिक होता था और यही उनकी जीविका का मुख्य स्त्रोत था। इस प्रकार लगभग 140 वर्षों तक मौर्य साम्राज्य रहा, ब्राह्मण दलित और दलित वर्गों की तरह रहे। ख्1,

बेचारे ब्राह्मणों के पास बौद्ध साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं था। यही विशेष कारण था, जिससे पुष्यमित्र ने मौर्य साम्राज्य के विरुद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया। पुष्यमित्र सुघ् गोत्र का था। सुघ् लोग सामवेदी ब्राह्मण होते थे ख्2,, जो पशुबलि और सोमबलि में विश्वास करते थे। इसलिए समूचे मौर्य साम्राज्य में पशुबलि निषिद्ध होने और अशोक द्वारा जगह-जगह शिलालेखों आदि पर उसकी घोषणा लिखवा देने से सुघों को अनेक कष्टों का भोगना स्वाभाविक था। यदि पुष्यमित्र ने, जो एक सामवेदी ब्राह्मण था, बौद्ध साम्राज्य को जो ब्राह्मनों के सभी कष्टों का कारण था, नष्ट कर ब्राह्मणों का उद्धार करने और उन्हें अपने धर्म के पालन की छूट देने का बीड़ा उठाया, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं हुई।

फ्पुष्यमित्र ने जो राजहत्याएं कीं, उनका उद्देश्य राज्यधर्म के रूप में बौद्ध धर्म को नष्ट करना और ब्राह्मणों को भारत का सर्वोच्च शासक बनाना था, जिससे राजा की राजनैतिक सत्ता की सहायता से बौद्ध धर्म पर ब्राह्मण धर्म की विजय हो सके। इस तथ्य की पुष्टि दो अन्य तथ्यों से होती है। पहला तथ्य स्वयं पुष्यमित्र के आचरण से संबंधित था। उपलब्ध साक्ष्य से पता चलता है कि राजगद्दी पर बैठने के बाद पुष्यमित्र ने अश्वमेघ यज्ञ अथवा अश्व यज्ञ कराया और इस वैदिक अनुष्ठान को केवल परम प्रभुतासंपन्न व्यक्ति ही करा सकता था। जैसा कि विन्सेंट स्मिथ कहते हैंः

फ्बौद्ध धर्म की सबसे अधिक उल्लेखनीय विशेषता है, पशुओं को अवध्य

मानकर उनको अभय जीवन प्रदान करना। अशोक की विधि-व्यवस्था की यही

सबसे बड़ी विशेषता थी। इस पर बहुत अधिक बल देने के परिणामस्वरूप ऐसे सभी

यज्ञ-कर्मों पर रोक लग गई, जिनमें पूजा-विधि के रूप में रक्त का उपयोग होता

था और जिस विधि को कट्टठ्ठर ब्राह्मण अपना प्रधान अनुष्ठान मानते थे, ब्राह्मणों ने

  1. मनु ने मनुस्मृति में ब्राह्मणों के लिए जो विशेषाधिकार मांगे, उनसे मौर्य शासन में ब्राह्मणों की हीन

भावना का पता चलता है। उनमें यह हीन भावना अपनी दलित स्थिति के कारण आई होगी। 2. बुद्धिस्टिक स्टडीज (सं. लॉ), अध्या. 34, पृ. 819, में श्री हरप्रसाद शास्त्री का लेख देखें।