7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 158

ब्राह्मणवाद की विजय

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इस तरह होते गए, जैसे पहाड़ की चोटी से बरफ और चट्टठ्ठानें बार-बार गिर रही हों, और इन हमलों ने कैसे गांव के गांव उजाड़ दिए और शासकों को अपदस्थ करते गए। भारत के इतिहास से यह बताने की कोशिश की गई कि इसमें एक ही महत्त्वपूर्ण बात मुसलमानों के आक्रमणों की सूची है। लेकिन अगर इसी संकीर्ण दृष्टि से देखा जाए, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि मुसलमानों के आक्रमण ही पठनीय नहीं हैं। यहां ऐसे ही अनेक आक्रमण हुए हैं, जो भले ही कोई अधिक महत्त्वपूर्ण न रहे हों। अगर हिंदू भारत पर मुसलमान आक्रमण् ाकारियों ने आक्रमण किए तो बौद्ध भारत पर ब्राह्मण आक्रमणकारियों ने आक्रमण किए थे। हिंदू भारत पर मुसलमानों के आक्रमण और बौद्ध भारत पर ब्राह्मणों के आक्रमण, दोनों में बहुत-सी समानताएं हैं। हिंदू भारत के मुसलमान आक्रमणकारियों ने अपने-अपने वंश की समृद्धि के लिए परस्पर लड़ाइयां लड़ीं। अरबों, तुर्कों, मंगोलों और अफगानों ने आपस में एक-दूसरे पर विजय पाने के लिए लड़ाइयां लड़ीं। लेकिन इनमें एक बात समान थी। उनका उद्देश्य मूर्तिपूजा को नष्ट करना था। इसी प्रकार बौद्ध भारत पर ब्राह्मण आक्रमण् ाकारियों ने परस्पर अपने ही वंश की श्रीवृद्धि के लिए लड़ाइयां लड़ीं। शुंगों, कण्वों और आंध्रों ने परस्पर एक-दूसरे पर अपनी धाक जमाने के लिए लड़ाइयां लड़ीं। लेकिन हिंदू भारत पर मुसलमान आक्रमणकारियों की तरह उनका एक-समान उद्देश्य था - बौद्ध धर्म और मौर्यों द्वारा स्थापित बौद्ध साम्राज्य का विनाश। अगर हिंदू भारत पर मुसलमानों के आक्रमण इतिहासकारों के लिए विवेचन का विषय बन सकते हैं, तो बौद्ध भारत पर ब्राह्मणों के आक्रमण भी विवेचन का विषय होना चाहिए। बौद्ध भारत में बौद्ध धर्म के दमन के लिए ब्राह्मणों ने जो उपाय और साधन अपनाए थे, उन उपायों और साधनों की तुलना में कम हिंसापूर्ण और कठोर नहीं थे, जो मुसलमान आक्रमणकारियों ने हिंदू धर्म का दमन करने के लिए अपनाए थे। सामान्य जनता के सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन पर स्थाई प्रभाव की दृष्टि से यदि हम विचार करें तो कहा जा सकता है कि बौद्ध भारत पर ब्राह्मण आक्रमण का इतना अधिक गंभीर प्रभाव पड़ा कि उसकी तुलना में हिंदू भारत पर मुसलमानों के आक्रमण का प्रभाव वस्तुतः सतही और क्षणिक रहा। मुसलमान आक्रमणकारियों ने हिंदू धर्म के बाहरी प्रतीकों, जैसे मंदिरों और मठों आदि को तो नष्ट किया था, लेकिन उन्होंने हिंदू धर्म को न तो निर्मूल किया और न उन्होंने उन सिद्धांतों या मतों से जनता को विमुख करने की ही कोशिश की, जो सामान्य जन के आध्यात्मिक जीवन को संचालित करते थे। ब्राह्मण आक्रमणों के प्रभाव ने उन सिद्धांतों में आमूल परिवर्तन कर दिया, जिनकी शिक्षा बौद्ध धर्म में एक शताब्दी से आध्यात्मिक जीवन के सच्चे और शाश्वत सिद्धांतों के रूप में दी थी और जो जन-सामान्य द्वारा जीवन-शैली के रूप में स्वीकार कर लिए गए और जिनका अनुपालन भी होता था। अगर हम इस रूपक को थोड़ा उलट कर कहें, तो कह सकते हैं कि उन्होंने किसी जलाशय में नहाते वक्त उसके जल को खूब हिलाया-डुलाया