148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तरह परिचित था और इसीलिए उसने, जैसा कि मनुस्मृति से स्पष्ट है, ब्राह्मणों के लिए कुछ एकाधिकार निश्चित किए और कुछ विशेष रियायतें और विशेषाधिकार स्वीकृत किए। पहले एकाधिकारों को लीजिएः
1.88. ब्राह्मणों के लिए उसने (वेद) पढ़ना और पढ़ाना अपने तथा दूसरों के लाभ
के लिए यज्ञ करना और कराना, दान देना और लेना कर्म निर्धारित किए हैं।
10.1. तीन प्रकार की द्विज जातियां (वर्ण) अपने-अपने कर्त्तव्यों का निर्वाह करने
के साथ-साथ (वेद का) अध्ययन करें, लेकिन इनमें से (केवल) ब्राह्मण वेद
पढ़ावें, दूसरे को वर्ण नहीं पढ़ावें, यह एक सुस्थापित सत्य है।
10.2. लोगों की आजीविका के जो भी साधन धर्म द्वारा निश्चित किए गए हैं,
उन्हें ब्राह्मण को जानना चाहिए, तदनुरूप वह दूसरों को निर्देश दे और स्वयं भी
धर्म के अनुसार जीवनयापन करें।
10.3. जाति की विशिष्टता से, उत्पत्ति स्थान की श्रेष्ठता से, अध्ययन एवं व्याख्यान
आदि द्वारा नियम के धारण करने से और यज्ञोपवीत, संस्कार आदि की श्रेष्ठता से
ब्राह्मण ही सब (वर्णों) का स्वामी है।
10.74. ऐसे ब्राह्मण जो उत्कृष्ट देवत्व प्राप्त करने के इच्छुक हैं और अपने कर्त्तव्य के
प्रति दृढ़ हैं, वे निम्नांकित छह कार्यों को क्रमानुसार पूर्णरूपेण निष्पादित करें।
10.75. वेदों का अध्ययन करना, दूसरों को वेदों का अध्ययन कराना, अपने लिए
एवं दूसरों को यज्ञ में सहायता करना, दान देना और दान लेना, ये छह कार्य
ब्राह्मण के लिए निर्दिष्ट हैं।
10.76. परंतु उसके लिए (ब्राह्मण के लिए) इन धर्म निर्दिष्ट छह कार्यों में से तीन
कार्य उसकी आजीविका के साधन हैं, अर्थात् अन्य के लिए यज्ञ-कर्म, अध्यापन
और सदाचारी व्यक्तियों से दान लेना।
10.77. ब्राह्मणों और क्षत्रियों में से क्षत्रियों के लिए वे तीन कर्म वर्जित हैं जो
ब्राह्मणों के लिए निर्दिष्ट हैं, अर्थात् अध्यापन, अन्य के लिए यज्ञ-कर्म और तीसरा,
दान स्वीकार करना।
10.78. वे कार्य इसी प्रकार वैश्य के लिए वर्जित हैं, यह निश्चित सत्य है, क्योंकि
मनु ने, जो प्रजापति हैं, इन दोनों जातियों के व्यक्तियों के लिए इन्हें निर्दिष्ट नहीं
किया है।
10.79. आजीविका के रूप में आयुध से आक्रमण करने और उसे फेंक कर मारने
का कार्य क्षत्रियों के लिए निर्दिष्ट है, व्यापार करना, पशुपालन और कृषि-कार्य