154 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
7.79. राजा अनेक यज्ञ (श्रौत कर्म) करें, जिनमें दक्षिणाएं दी जाएं और यश प्राप्त
करने के लिए वह ब्राह्मणों को भोग के पदार्थ और धन दे।
7.82. वह उन ब्राह्मणों की पूजा करे, जो गुरु के गृह से (वेद का अध्ययन करने
के बाद) वापस आए हैं, क्योंकि जो धन ब्राह्मणों को दिया जाता है, वह राजाओं
के लिए अक्षय कोष कहा गया है।
7.83. उसे न तो चोर और न शत्रु ही लेते हैं और वह नष्ट नहीं हो सकता, इसलिए
राजाओं द्वारा कोई अक्षय कोष ब्राह्मणों के पास अवश्य रखा जाना चाहिए।
11.4. लेकिन राजा जैसा कि उचित है, यज्ञ विधानार्थ सभी प्रकार के रत्न और
उपहार वेदज्ञाता ब्राह्मणों को दे।
मनु की राजा को यह चेतावनी ब्राह्मणों के लिए केवल आशा के रूप में नहीं रही। इतिहास साक्षी है कि ब्राह्मणों ने इस उपदेश का पूरा-पूरा लाभ उठाया। इसके प्रमाण स्वरूप अनेक दान-पत्र हैं, जिन्हें पुरातत्वज्ञों ने खोज निकाला है और जो इसकी सूचना देते हैं। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि ब्राह्मणों ने राजाओं को इतना मूर्ख बनाया कि उन्होंने गांव के गांव धूर्त, आलसी और अकर्मण्य ब्राह्मणों को हस्तांतरित कर दिए। निस्संदेह आज के ब्राह्मणों के पास जो संपत्ति है, वह इसी ठग विद्या के कारण है जिसका प्रयोग धूर्त ब्राह्मण धार्मिक प्रवृत्ति के किंतु मूर्ख राजाओं पर करते रहे। मनु इसी बात से संतुष्ट नहीं था कि दान के लिए ब्राह्मण राजा का शोषण करे। उसने दान के मामले में ब्राह्मण को जनता का भी शोषण करने की अनुमति दी। यह उसने तीन प्रकार से किया। सबसे पहले तो वह लोगों को उस कर्त्तव्य के एक भाग के रूप में दान देने के लिए प्रेरित करता है, जिसे धर्मनिष्ठ व्यक्ति अपना कर्त्तव्य समझता है। इसके साथ-साथ वह यह भी बताता है कि ब्राह्मण को दिया गया दान सर्वश्रेष्ठ होता है।
- जो ब्राह्मण नहीं है, उसको दिया गया दान सामान्य (फल), जो अपने को
ब्राह्मण कहता है, उसको दिया गया दान दुगुना फल, जो ब्राह्मण विद्वान है उसको
दिया गया दान दस लाख गुना फल, जो ब्राह्मण वेद और अंगों को जानता है
उसको दिया गया दान अपरिमित फल देने वाला होता है।
7.86. चूंकि दान प्राप्त करने वाले विशिष्ट गुणों के अनुसार और दान देने वाले
की श्रद्धा के अनुसार दान के बदले कुछ थोड़ा या अधिक फल अगले जन्म में
प्राप्त होगा।
इसके आगे मनु यह कहता है कि कुछ परिस्थितियों में ब्राह्मण को दान देना अनिवार्य है।
11.1. उसे जो संतान के लिए विवाह करने का इच्छुक है, उसे जो यज्ञ करना चाहता