164 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
व्यास की वंशावली
वरुणमित्र = उर्वशी
वशिष्ठ = अक्षमाला
शक्ति =
पाराशर = मत्स्यगंधा
= व्यास
ब्राह्मणवाद ने पशु की तरह घोर नृशंस हो विभिन्न वर्णों के बीच अंतर्विवाहों को रोक देने का काम जारी रखा। मनु एक नया नियम बना देता है। यह नियम निम्न प्रकार से हैः
3.12. द्विजों के प्रथम विवाह के लिए समान जाति की स्त्रियां श्रेष्ठ होती हैं। 3.13. यह सच है कि शूद्र स्त्री ही किसी शूद्र की पत्नी हो सकती है। 3.14. किसी भी (प्राचीन) आख्यान में ब्राह्मण या क्षत्रिय की (प्रथम) पत्नी के शूद्र होने का उल्लेख नहीं किया गया है, हालांकि इन्होंने कष्टपूर्ण जीवनयापन किया है।
3.15. जो द्विज लोग मोह में नीची (शूद्र) जाति की स्त्रियों के साथ विवाह कर लेते हैं, वे शीघ्र ही अपने परिवारों और उनके बच्चों को शूद्रों की स्थिति में ला देते हैं।
3.16. अत्रि का और उतथ्य के पुत्र (गौतम) का मत है कि जो शूद्र स्त्री के साथ विवाह कर लेता है, वह जातिच्युत हो जाता है, शौनक का और भृगु का मत है कि जब किसी के केवल शूद्र स्त्री से किसी संतान का जन्म होता है (तब वह जातिच्युत हो जाता है)।
3.17. जो ब्राह्मण किसी शूद्र स्त्री के साथ शैया पर संभोग करता है, वह (मृत्यु के बाद) नरक में जा गिरता है।