7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 191

176 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

विवाह को रोकना कठिन कार्य है। भिन्न-भिन्न जातियों के लोग प्रेम या आवश्यकता होने के कारण अपनी-अपनी जातियों के बाहर जा सकते हैं। ब्राह्मणवाद ने ये नियम इसी आवश्यकता के विरुद्ध व्यवस्था करने के लिए ही बनाए। मेरा यह स्पष्टीकरण इन नए नियमों के बारे में है, जो ब्राह्मणवाद ने बनाए हैं। यह स्पष्टीकरण सभी को स्वीकार्य न हो, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता कि ब्राह्मणवाद विभिन्न वर्गों के बीच हो रहे विवाहों को रोकने के लिए हर संभव उपाय कर रहा था।

ब्राह्मणवाद के अभिप्राय का एक और दृष्टांत यह नियम है जो मनु ने किसी व्यक्ति को जाति से बहिष्कृत करने के बारे में बनाया था।

मनु कहता है कि जो व्यक्ति अपनी जाति से बहिष्कृत ख्1, कर दिया जाता है, उसे ऐसे समझना चाहिए जैसे वह वास्तविक रूप में मर गया हो।

मनु आदेश देता है कि उसकी अंत्येष्टि करनी चाहिए। वह उसकी अंत्येष्टि के बारे में विधि और पद्धति निश्चित करता है।

11.182. बहिष्कृत व्यक्ति के सपिंड और समानोदकों को चाहिए कि वह संबंधियों, ऋत्विकों और गुरुओं की उपस्थिति में सायंकाल को किसी अशुभ दिन (नगर से) बाहर (उसे, जैसे वह दिवंगत हो गया है) जल (तर्पण) करे।

11.183. दासी जल से भरे घड़े को अपने पैर से ठोकर मारकर उलट दे, जैसे किसी मृत व्यक्ति को (जल का अर्पण किया गया), (उसके सपिंड) और समानोदक एक दिन और एक रात अशुद्ध रहेंगे।

तथापि मनु, जैसा कि निम्नलिखित नियमों से स्पष्ट है, बहिष्कृत व्यक्ति को प्रायश्चित करने पर जाति में वापस सम्मिलित होने की अनुमति देता हैः

11.186. लेकिन जब वह प्रायश्चित कर ले, वे उसके साथ किसी पवित्र सरोवर में स्नान करें और जल से भरे गए घड़े को उस जलाशय में छोड़ दें।

11.187. लेकिन वह उस घड़े को जलाशय में छोड़ दे, अपने घर में प्रवेश करे और पहले की तरह जाति संबंधी सभी कार्यों को करे।

11.188. बहिष्कृत हुई स्त्रियों के साथ भी इसी नियम का पालन किया जाए, लेकिन उन्हें वस्त्र, भोजन और पानी दिया जाए और वह अपने परिवार के घर के पास रहे।

लेकिन यदि बहिष्कृत व्यक्ति अवमानना करता है और पश्चाताप-मुक्त नहीं है, तब मनु दंड की व्यवस्था करता है। मनु बहिष्कृत व्यक्ति को परिवार के साथ रहने की अनुमति नहीं देता। मनु निर्देश देता हैः

  1. जैसा कि आगे स्पष्ट किया गया है, ‘बहिष्कृत’ और ‘अछूत’ दो अलग-अलग संकल्पनाएं हैं।