7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 206

ब्राह्मणवाद की विजय

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5.148. स्त्री को बचपन में अपने पिता, युवावस्था में अपने पति और जब उसका

पति दिवंगत हो जाए तब अपने पुत्रों के अधीन रहना चाहिए, स्त्री को कभी भी

स्वतंत्र नहीं रहना चाहिए।

5.149. स्त्री को अपने पिता, पति या पुत्रों से अपने को अलग करने की इच्छा

नहीं करनी चाहिए, इनको त्याग कर वह दोनों परिवारों (उसका परिवार और पति

का परिवार) को निंदित कर देती है। स्त्री को अपना पति छोड़ देने का अधिकार

नहीं मिल सकता।

9.45. पति अपनी पत्नी के साथ एक इकाई है। इसका तात्पर्य यह है कि स्त्री

का एक बार विवाहित होने के बाद कोई विच्छेद नहीं हो सकता।

बहुत से हिंदू यहीं रुक जाते हैं, मानों विवाह-विच्छेद के बारे में मनु के नियम का यही सब कुछ सार हो और इसे आदर्श कहते रहते हैं। वह यह सोचकर अपने विवेक पर पर्दा डाल देते हैं कि मनु ने विवाह को संस्कार की तरह माना है और इसलिए उसने विच्छेद की अनुमति नहीं दी। यह बात निश्चय ही सत्य से कोसों दूर है। मनु के विच्छेद-नियम का बिल्कुल भिन्न उद्देश्य था। वह पुरुष को स्त्री से बांध देने की बात नहीं, बल्कि यह स्त्री को पुरुष से बांध देने और पुरुष को स्वतंत्र रखने की बात थी, क्योंकि मनु पुरुष को अपनी पत्नी को त्याग देने से नहीं रोकता। वस्तुतः वह उसे अपनी पत्नी को केवल छोड़ देने की अनुमति नहीं, बल्कि उसे बेच देने की भी अनुमति देता है। वह पत्नी को स्वतंत्र न रहने का नियम बनाता है। देखिए, मनु क्या कहता हैः

9.46. न तो बेचने और न त्याग देने से कोई स्त्री अपने पति से मुक्त होती है।

इसका अर्थ यह है कि कोई स्त्री बेचे या त्याग दिए जाने से किसी दूसरे व्यक्ति की, जिसने उसे खरीद लिया है या त्याग देने के बाद प्राप्त किया है, वैध पत्नी नहीं हो सकती। अगर यह असंगत नहीं है, तो कुछ भी असंगत नहीं हो सकता। लेकिन मनु अपने नियम के परिणामस्वरूप होने वाले न्याय या अन्याय के बारे में चिंतित नहीं था। वह स्त्री को उस स्वतंत्रता से वंचित कर देना चाहता था जो उसे बौद्ध काल में थी। वह यह जानता था कि स्त्री द्वारा अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने या शूद्र के साथ विवाह करने की उसकी इच्छा होने से वर्ण-व्यवस्था नष्ट हो गई थी। मनु स्त्री की स्वतंत्रता से कु्रद्ध था और इसे रोक कर उसने उसे उसकी स्वतंत्रता से वंचित कर दिया।

संपत्ति के मामले में पत्नी का स्थान मनु द्वारा दास के स्तर पर लाकर पटक दिया गया।