7. ब्राह्मणवाद की विजय : राजहत्या अथवा प्रतिक्रांति का जन्म - Page 209

194 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दसावत बनाए रखकर शूद्रों और स्त्रियों के विरुद्ध जोरदार अभियान शुरू किया और वे इनको पराधीन बनाने में सफल भी हुए। शूद्र तीनों उच्च वर्ण के दास और स्त्रियां अपने-अपने पतियों की गुलाम बना दी गईं बौद्ध धर्म पर विजय पाने के बाद ब्राह्मण् ावाद ने जो काले कारनामे किए, उनमें सबसे ज्यादा काला कारनामा यही था। इतिहास में इसके जोड़ की कोई मिसाल नहीं मिलती जहां बलपूर्वक अधिकार जमाने वाली किसी सत्ता ने अपने वर्ग के आधिपत्य को बनाए रखने के लिए किसी को इस प्रकार पदावनत करने के इतने घृणित कार्य किए हों। ब्राह्मणवाद ने पददलित करने का जो कार्य किया, उसे दुर्भाग्यवश उसमें पूरी सफलता नहीं मिली। यह ‘स्त्री’ और ‘शूद्र’ जैसे शब्दों तक रह गई। जो लोग अपने पातक कर्म की थोड़ी बहुत झलक पाना चाहते हैं, वह इन दोनों शब्दों के पीछे खड़ी भीड़ को देखें। ये शब्द जनसंख्या के कितने बड़े भाग को अपने में समेट लेते हैं? स्त्रियां सारी जनसंख्या का आधा भाग हैं। जो कुछ बचा, उसमें दो तिहाई तक शूद्र हैं। ये दोनों मिलकर सारी जनसंख्या का 75 प्रतिशत तक होते हैं। यह वह विशाल जनसमूह है जिसे ब्राह्मणवाद पर पदावनत कर 75 प्रतिशत लोगों से उनके जीने का, उनकी आजादी का और उनके सुख-चैन से रहने का अधिकार छीन लिया गया, जिसके कारण अगर भारत एक मृत राष्ट्र नहीं तो ”ासशील राष्ट्र बनकर रह गया।

वर्गीकृत असमानता का सिद्धांत सारी मनुस्मृति में छाया हुआ है। जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां मनु ने वर्गीकृत असमानता के सिद्धांत को आधार न बनाया हो। इस सिद्धांत की पूरी व्याख्या करने के लिए सारी मनुस्मृति को पुनः उद्धृत करना होगा। मनु के कारण वर्गीकृत असमानता का सिद्धांत किस तरह सामाजिक जीवन में रच-पच गया है, इसे स्पष्ट करने के लिए मैं कुछ ही क्षेत्रों की चर्चा करूंगा। विवाह को लीजिए और मनु के नियमों को देखिएः

3.13. शूद्र स्त्री केवल शूद्र की पत्नी बन सकती है, वह और वैश्य स्त्री वैश्य

पुरुष की, शूद्र और वैश्य स्त्री क्षत्रिय पुरुष की, तथा यह तीनों वर्णों की स्त्रियां

तथा ब्राह्मणी-ब्राह्मण की पत्नी हो सकती है।

अब अतिथियों के सत्कार के बारे में मनु के नियम लीजिएः

3.110. लेकिन क्षत्रिय जो ब्राह्मण के घर आता है, अतिथि नहीं कहलाता, न वैश्य,

न शूद्र और न कोई मित्र, न संबंधी, न ही गुरु।

3.111. लेकिन क्षत्रिय अगर ब्राह्मण के घर अतिथि के रूप में आ जाए, तब गृहस्थ

उसे उक्त ब्राह्मणों के भोजन करने के बाद अपनी इच्छानुसार भोजन कराए।