8. हिंदू समाज के आचार-विचार - Page 226

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हिंदू समाज के आचार-विचार

इकसठ पृष्ठों की टाइप की हुई मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि की उपलब्ध

दूसरी प्रति में डॉ. अम्बेडकर द्वारा स्वयं जो शुद्धियां और संशोधन किए गए

हैं, उन सभी को अंग्रेजी प्रकाशन और प्रस्तुत अध्याय में शामिल कर लिया

गया है। ‘मनुस्मृति और दि गोस्पल ऑफ काउंटर रिवोल्यूशन’ शीर्षक से

बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को जो अलग

से फाइल मिली, उसमें ‘मनुस्मृति’ पर विभिन्न शीर्षकों के अंतर्गत कुछ

टिप्पणियां लिखी मिली थीं। ये सभी टिप्पणियां ‘दि मोरल्स ऑफ दि हाउस’

(हिंदू समाज के आचार-विचार) शीर्षक निबंध में शामिल की गई मिली हैं।

उन टिप्पणियों को अलग से मुद्रित करना पुनरावृत्ति मात्र लगता है। इसलिए

उक्त टिप्पणियों को अलग से मुद्रित नहीं किया गया है - संपादक

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हिंदुओं के आचार-विचार और धार्मिक सिद्धांत स्मृतियों द्वारा निर्धारित हैं। ये स्मृतियां हिंदुओं के पवित्र साहित्य का एक अंग है। अगर हम हिंदुओं की नैतिकता और उनके धर्म को समझना चाहते हैं तब हमें स्मृतियों का अध्ययन अवश्य करना चाहिए। स्मृतियों की संख्या कुछ कम नहीं हैं। साधारणतः अनुमान है कि उनकी कुल संख्या 108 है। स्मृतियों की इतनी बड़ी संख्या हमारी समस्या के समाधान में कोई कठिनाई नहीं पैदा कर सकती। इसका कारण यह है कि हालांकि स्मृतियां अनेक हैं, तो भी वे मूलतः एक-दूसरे से भिन्न नहीं हैं। इनमें इतनी ज्यादा समानता है कि कभी-कभी इनको पढ़ना नीरस लगने लगता है। इसका स्रोत एक ही है। यह स्रोत है मनुस्मृति जो ‘मानव धर्म शास्त्र’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। अन्य स्मृतियां मनुस्मृति की सटीक पुनरावृत्ति हैं। इसलिए हिंदुओं के आचार-विचार और धार्मिक संकल्पनाओं के विषय में पर्याप्त अवधारणा के लिए मनुस्मृति का अध्ययन ही यथेष्ट है।