8. हिंदू समाज के आचार-विचार - Page 227

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

हम कह सकते हैं कि मनुस्मृति नियमों की एक संहिता है। यह कथन अन्य स्मृतियों के बारे में भी सच है। यह न तो नीतिशास्त्र है और न ही कोई धार्मिक ग्रंथ है। नियमों की किसी भी संहिता को नीतिशास्त्र या किसी धार्मिक ग्रंथ के रूप में ग्रहण करना नीतिशास्त्र, धर्म और नियम, इन तीनों को आपस में ग्यस्त्रम्यस्त्र कर देना है।

पहली बात तो यह है कि धर्म को कानून से अलग करना आधुनिक युग की देन है। प्राचीन समाज में कानून और धर्म एक होते थे। प्रो. मैक्समूलर ख्1, का कहना है कि हालांकि-

फ्कानून स्वाभाविक रूप से समाज का आधार और ऐसा सूत्र प्रतीत होता है जो

किसी राष्ट्र को आपस में बांधे रखता है। जो लोग और गहराई से विचार करते हैं,

उन्हें यह बात जन्दी ही समझ में आ जाती है कि कानून, कम से कम प्राचीन कानून

को अधिकार, शक्ति और जीवन धर्म से ही प्राप्त होती है... यह विश्वास अनेक

राष्ट्रों की प्राचीन परंपराओं में मिलता है कि साधारण मनुष्यों की अपेक्षा विधिकर्ता

का देवी-देवताओं से अधिक घनिष्ठ संबंध था। - डिबयोडोरस साइकुलस के एक

प्रसिद्ध अनुच्छेद के अनुसार मिस्रवासियों का यह विश्वास था कि उनके कानून

हर्मिस द्वारा मेनबिस को बताए गए थे, क्रेताउस का विश्वास था कि मिनोस को

अपने कानून जेऊस से प्राप्त हुए, लैकेदामोनियन का विश्वास था कि लाइकुर्गुस को

अपने कानून अपोलोन से उपलब्ध हुए थे। एरियनों के मतानुसार उनके विधिकर्ता

जरथूस्त्र को अपने कानून पवित्र आत्मा से प्राप्त हुए। स्टो के अनुसार जमोलिक्सिस

को अपने कानून देवी हेस्तिया से प्राप्त हुए और यहूदियों का मत है कि मोजेस को

अपने कानून प्रभु इयास से प्राप्त हुए।य्

सर हेनरी मेन्स ख्2, ने यह बात जितना जोर देकर कही, उतना शायद ही किसी और ने कहा हो, कि प्राचीन काल में धर्म दैवी शक्ति के रूप में जीवन के प्रत्येक पक्ष और प्रत्येक सामाजिक संस्था में अंतर्निहित था और उसकी पुष्टि करता था। वह धर्म के विषय में कहते हैंः

फ्वह एक अलौकिक सर्वोच्च सत्ता थी, जिसका उद्देश्य उस समय की सभी

प्रधान संस्थाओं, राज्य, जाति और परिवार को पवित्र रखना तथा एक-दूसरे के साथ

परस्पर जोड़े रखना था।’’

कानून को इस अलौकिक सर्वोच्च सत्ता से छुटकारा पाना बहुत दिनों तक संभव नहीं हो सका, लेकिन बाद में इसका संबंध धर्म से बिल्कुल टूट गया। फिर भी उसमें बहुत से ऐसे चिह्न अभी भी मिलते हैं, जिनसे यह प्रमाणित होता है कि मानव इतिहास के आरंभिक दिनों में इसका धर्म के साथ कितना अधिक संबंध था।

  1. साइंस ऑफ रिलीजन, पृ. 150-51

  2. एनसिएंट लॉ, पृ. 6