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हिंदू समाज के आचार-विचार

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धर्म और बाद में बौद्ध धर्म की शाखा-प्रशाखाओं से भिन्न है, जो शायद सिख धर्म

से और जैन धर्म से, हालांकि बहुत संदेह है, भिन्न है।य्

सर जे.ए. बेन्स ख्1, ने हिंदू धर्म की परिभाषा इस प्रकार की हैः

फ्वह विपुल जनसंख्या जो न सिख है, न जैन, न बौद्ध या न घोर आत्मावादी, जो इस्लाम, प्राचीन पारसी, ईसाई या हिबू्र आदि धर्मों में शामिल नहीं हैं।य्

सर एडबर्ड गैट ख्2, के लिए हिंदू धर्मµ

फ्मत-मतांतरों का एक जटिल जीवाणु कोष है। इसमें एकेश्वरवाद, बहुदेव,

सर्वेश्वरवाद, महादेव शिव और विष्णु, दुर्गा और लक्ष्मी तथा मातृकाओं, वृक्षों,

शिलाओं और नदियों और छोटे-मोटे ग्राम देवताओं व देवियों के उपासक, वे लोग

जो अपने देवी-देवताओं को बलि देकर संतुष्ट करते हैं और वे लोग जो किसी

जीव की हिंसा नहीं करते, बल्कि वे लोग भी जो ‘काटना’ शब्द तक के प्रयोग

को वर्जित समझते हैं, वे लोग जिनकी पूजा-विधि में मुख्यतः स्तुति और भजनों

का समावेश होता है, और वे लोग जो धर्म के नाम पर गोपनीय रहस्यपूर्ण अनुष्ठान

करते हैं, सभी लोग आते हैं।य्

यह हिंदू धर्म की जटिलता का बहुत कुछ पूर्ण विवरण तो है, लेकिन यह अभी भी अपूर्ण है। इस सूची में उन लोगों को भी शामिल किया जाना चाहिए जो गौ की पूजा करते हैं, और वे लोग भी जो उसे खाते हैं, वे लोग भी जो प्राकृतिक शक्तियों की पूजा करते हैं, और वे लोग भी जो केवल एक ईश्वर की उपासना करते हैं और वे लोग भी जो मूर्तियों, दानवों, प्रेतों, पितरों, संतों और शूरवीरों के उपासक हैं।

ये वे उत्तर हैं, जो तीन जनगणना आयुक्तों ने सीधे सवाल के लिए कि हिदू धर्म क्या है। बाकी लोगों को इसका उत्तर देना काफी कठिन लगा। जरा देखिए सर ए. लाइल इस प्रश्न का उत्तर किस प्रकार देते हैं। उन्होंने कैम्ब्रिज में सन 1891 ईस्वी में आयोजित अपने ‘रीड व्याख्यान’ में कहा था ख्3, ः

फ्अगर मुझसे हिंदू धर्म की परिभाषा पूछी जाए, तब मेरे पास कोई सटीक उत्तर नहीं होगा। मैं संक्षेप में इसकी ऐसी कोई परिभाषा नहीं दे सकता जो इसके मूल सिद्धांतों और आस्थाओं को व्यक्त करती हो, जैसा कि मैं इतिहास प्रसिद्ध अन्य धर्मों की परिभाषा देते हुए करता। इसका कारण यह है कि ‘हिंदू’ शब्द केवल धर्म का परिचायक नहीं है। यह देश का भी नाम है और कुछ सीमा तक जाति का भी नाम है। जब हम ईसाई,

  1. सेन्सस ऑफ इंडिया रिपोर्ट (1881), पृ. 158

  2. वही (1881), पृ. 158

  3. एशियाटिक स्टडीज, खंड 2, पृ. 287-88