8. हिंदू समाज के आचार-विचार - Page 239

224 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

7.130. राजा को पशु पर, स्वर्ण और चांदी पर, उसमें प्रतिवर्ष वृद्धि होने पर, पचासवां भाग, अनाज पर आठवां भाग, छटवां भाग या बारहवां भाग, मिट्टी के अंतर और उसे पैदा करने के लिए आवश्यक श्रम के अनुसार कर लेना चाहिए।

7.131. उसे वृक्षों, मांस, मधु, घी, इत्र, औषधि पदार्थ, द्रवों, पुष्पों, कंद और फल पर प्रतिवर्ष वृद्धि का छठवां भाग भी लेना चाहिए।

7.132. एकत्रित पत्तियों, साग-भाजी, घास, चमड़े या बेंत से बने बर्तन, मिट्टी के बर्तन और पत्थर की बनी सभी चीजों पर (छठा भाग कर के रूप में वसूल करे)।

7.133. चाहे कोई राजा अपूर्ण इच्छाग्रस्त होकर मर भी क्यों न रहा हो तब भी वह वेदपाठी ब्राह्मण से कर न ले, न ऐसे ब्राह्मण को कष्ट दे जो उसके क्षेत्र में रह रहा हो और जो भूख से ग्रस्त हो।

7.134. जिस राजा के राज्य में विद्वान ब्राह्मण क्षुधाग्रस्त रहता है, उस राजा के राज्य में शीघ्र ही अकाल पड़ता है।

7.137. राजा अपने राज्य में रहने वाले लोगों से जो सामान्यतम व्यापार कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं, वार्षिक कर के रूप में कुछ ग्रहण करे।

7.138. राजा उन लोगों से हर महीने एक दिन काम करवाए जो छोटे दस्तकार, कारीगर और मजदूर हैं और जो श्रम कर जीविकोपार्जन करते हैं।

8.394. राजा अंधे व्यक्ति से, मूर्ख से, अपंग से और सत्तर वर्ष के वृद्ध से और न उनसे जो विद्वान ब्राह्मणों के उपकार में रत हैं, किसी भी प्रकार का कर ले।

10.118. जो राजा युद्ध होने पर या आक्रमण होने पर आपातकाल में अपनी प्रजा से उसकी पैदावार का चतुर्थांश भी लेता है और यथाशक्ति अपनी प्रजा की रक्षा करता है, वह कोई पातक कर्म नहीं करता।

10.119. उसका मुख्य धर्म विजय प्राप्त करना है और उसे युद्ध से विमुख नहीं होना चाहिए, जिससे जहां वह शस्त्रास्त्र से व्यापारियों और किसानों की रक्षा करता है, वहां इस रक्षा पर व्यय की पूर्ति के लिए कानूनी तौर पर कर लगाए।

10.120. समृद्धि-काल में व्यापारियों पर उनके धन का बारहवां भाग और उनके निजी लाभ का पांचवां भाग कर रूप में होता है, विपत्ति में यह उनके धन का आठवां भाग या छठा भाग हो सकता है, जो औसत है। यह महान विपत्ति में चौथा भाग भी हो सकता है, लेकिन उनके धन पर लाभ और अन्य चल संपत्ति पर बीसवां भाग अधिकतम कर है, सेवक वर्ग, कारीगर, बढ़ई आदि जो कोई कर नहीं देते हैं, उन्हें अपने श्रम से सहायता करनी चाहिए।