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हिंदू समाज के आचार-विचार

मनु ऐसे साक्षियों का भी विवेचन करता है जो झूठी गवाही देते हैंः

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8.122. विद्वानों ने ये दंड निर्धारित किए हैं, जिनका विधान महर्षियों ने झूठी गवाही देने के अपराध के लिए किया है, जिससे अन्याय रोका जा सके और अधर्म का निवारण हो सके।

8.123. न्यायप्रिय राजा तीनों निम्न वर्णों के व्यक्तियों पर झूठी गवाही देने पर पहले जुर्माना करे और अगर वे बार-बार ऐसा करें, तब अपने राज्य से निष्कासित कर दे, लेकिन ब्राह्मण को वह केवल निष्कासित करे।

लेकिन मनु ने वहां एक अपवाद का विधान किया हैः

8.112. रति या विवाह प्रस्ताव के समय स्त्री से, गौ द्वारा घास या फल खा लेने पर, यज्ञ के लिए समिधा ले लेने पर, या ब्राह्मण के रक्षणार्थ आश्वासन देने पर, यदि झूठी शपथ ली जाए तब वह घोर पातक कर्म होता है।

कानूनी कार्रवाई के समय संबंधित पक्ष की स्थिति की व्याख्या मनु ने कुछ उदाहरण देकर की है, जो कुछ महत्त्वपूर्ण फौजदारी मामलों से संबंधित है। मानहानि या अपराध लीजिए। मनु कहता हैः

8.267. जो क्षत्रिय किसी ब्राह्मण की मानहानि करेगा, तो उस पर सौ पण, वैश्य पर डेढ़ सौ या दो सौ पण का आर्थिक दंड लगेगा, लेकिन उस प्रकार के अपराध के लिए यांत्रिक या शूद्र को कोड़े लगाए जाएं।

8.268. कोई ब्राह्मण यदि किसी क्षत्रिय से कटु वचन कहे तब पचास पण, वैश्य से कहे तब पचीस पण और शूद्र व्यक्ति से कहे तब बारह पण लिए जाएं। अपमान करने का अपराध लीजिए मनु कहता हैः

8.270. यदि कोई शूद्र किसी द्विज को गाली देता है तब उसकी जीभ काट देनी चाहिए, क्योंकि वह ब्रह्मा के निम्नतम अंग से पैदा हुआ है।

8.271. यदि वह तिरस्कारपूर्वक उनके नाम और वर्ण का उच्चारण करता है, जैसे वह यह कहे ‘देवदत्त तू नीच ब्राह्मण है’ तब दश अंगुल लंबी लोहे की छड़ उसके मुख में कील दी जाए।

8.272. अगर वह अभिमानपूर्वक ब्राह्मणों को उनके कर्तव्य के बारे में निर्देश दे, तब राजा उसके मुख और कानों में गरम तेल डलवाए।

गाली देने का अपराध लीजिए। मनु कहता हैः

8.276. यदि ब्राह्मण और क्षत्रिय आपस में एक-दूसरे को गाली दें, तब यह अर्थदंड विद्वान राजा द्वारा निश्चित किया जाए, जो ब्राह्मण पर न्यूनतम और क्षत्रिय पर औसत होगा।