8. हिंदू समाज के आचार-विचार - Page 249

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

8.277. जैसा कि ऊपर कहा गया है जीभ काटने के दंड को छोड़कर ऐसा ही दंड वैश्य और शूद्र के आपस में एक-दूसरे को गाली देने पर दिया जाए, यह दंड का शाश्वत नियम है।

मारपीट करने के अपराध को लीजिए। मनु कहता हैः

8.279. निम्न कुल में पैदा कोई भी व्यक्ति यदि अपने से श्रेष्ठ वर्ण के व्यक्ति के साथ मारपीट करे और उसे क्षति पहुंचाए, तब उसका अंग कटवा दिया जाए, या क्षति के अनुपात में न्यूनाधिक अंग कटवा दिया जाए, यह मनु का आदेश है।

8.280. यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के विरुद्ध हाथ या लाठी उठाए, तब उसका हाथ कटवा दिया जाए और अगर कोई व्यक्ति गुस्से में किसी दूसरे व्यक्ति को लात से मारे, तब उसका पैर कटवा दिया जाए।

मिथ्या दर्प का अपराध लीजिए। मनु के अनुसारः

8.281. निम्नतम वर्ण का व्यक्ति यदि ढिठाई से उच्चतम व्यक्ति के आसन पर साथ-साथ बैठे, तब राजा उसकी पीठ को तपाए गए लोहे से दगवा कर अपने राज्य से निष्कासित कर दे, या उसके नितंब को कटवा दे।

8.282. यदि वह गर्व से उस पर थूक दे तब राजा दोनों ओठों को, पेशाब कर दे तब उसके लिंग को और अगर उसकी ओर अपान वायु निकाले तब उसकी गुदा को कटवा दे।

8.283. यदि वह ब्राह्मण को उसकी शिक्षा से या उसके दोनों पैरों से या उसकी श्मश्रु से या गर्दन से या अंडकोष से पकड़े, तब राजा निस्संकोच उसके दोनों हाथ कटवा दे।

8.359. यदि शूद्र वर्ण का कोई व्यक्ति ब्राह्मण की स्त्री के साथ व्यभिचार करता है, तब वह प्राणदंड के योग्य होता है, क्योंकि चारों वर्णों की पत्नियों की निश्चय विशेष सुरक्षा की जानी चाहिए।

8.366. यदि शूद्र वर्ग का कोई व्यक्ति उच्च वर्ग में जन्म लेने वाली किसी किशोरी के साथ प्रेम करता है, तब उसे शारीरिक दंड दिया जाए, लेकिन जो समान वर्ग वाली किशोरी के साथ प्रेम करे और उस किशोरी का पिता स्वीकार करे, तब वह उसे उचित उपहार आदि देकर उसके साथ विवाह करेगा।

8.374. यदि कोई यांत्रिक या शूद्र द्विज की स्त्री के साथ जो अपने घर पर रक्षित हो या अरक्षित हो, तब उसे इस प्रकार दंड दिया जाए। यदि वह अरक्षित थी तब उसका आधा या सारा लिंग कटवा दिया जाए और यदि वह रक्षित थी और द्विज अनुपस्थित था, तब उसकी सारी संपत्ति, यहां तक कि उसका जीवन भी छीन लिया जाए।