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हिंदू समाज के आचार-विचार

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8.375. ब्राह्मण की रक्षित पत्नी के साथ व्यभिचार करने पर वैश्य को एक वर्ष तक जेल में रखने के बाद उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाए, ऐसा ही कर्म करने पर क्षत्रिय को एक हजार पण का आर्थिक दंड दिया जाए और उसका सिर गधे के मूत्र से मुंडवा दिया जाए।

8.376. यदि कोई वैश्य या क्षत्रिय ब्राह्मण वर्ग की स्त्री के साथ व्यभिचार करे और जिसकी रक्षा करने वाला उसका पति घर पर न हो, तब राजा वैश्य को पांच सौ पण और क्षत्रिय को एक हजार पण का आर्थिक दंड दे।

8.377. ये दोनों यदि किसी ऐसी ब्राह्मणी के साथ अपराध करें जो न केवल रक्षित हो, बल्कि सद्गुणों के लिए प्रतिष्ठित हो, तब उन्हें शूद्र वर्ग के व्यक्ति की तरह दंड दिया जाए, या उन्हें सूखे घास या फूंस में जलाया जाए।

8.382. यदि कोई वैश्य किसी क्षत्रिय की रक्षित स्त्री के साथ, या कोई क्षत्रिय किसी वैश्य की स्त्री के साथ व्यभिचार करे, तब ये दोनों वैसा ही दंड पाने के अधिकारी हैं, जो अरक्षित ब्राह्मणी के प्रसंग में दिया जाता है।

8.383. किंतु यदि काई ब्राह्मण इन दोनों वर्णों की रक्षित स्त्री के साथ व्यभिचार करता है, तब उसको एक सहÐ पण का आर्थिक दंड दिया जाना चाहिए, ऐसा ही अपराध शूद्र वर्ग की स्त्री के साथ करने पर क्षत्रिय या वैश्य को भी एक हजार पण का आर्थिक दंड दिया जाना चाहिए।

8.384. यदि कोई वैश्य क्षत्रिय वर्ग की किसी स्त्री के साथ व्यभिचार करता है और वह अरक्षित हो, तब उसको पांच सौ पण और यदि कोई क्षत्रिय इस प्रकार का अपराध करता है, तब पेशाब से उसका सिर मुंडवा दिया जाए या उसको उक्त आर्थिक दंड दिया जाए।

8.385. यदि कोई ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र वर्ग की किसी अरक्षित स्त्री के साथ व्यभिचार करता है, तब वह पांच सौ पण का आर्थिक दंड देगा और यदि वह किसी अन्त्यज जाति की स्त्री के साथ व्यभिचार करता है, तब एक हजार पण का आर्थिक दंड देगा।

मनु ने विभिन्न अपराधों के लिए जो योजना बनाई, उससे इस विषय पर कुछ रोचक तथ्य प्रकाश में आते हैंः

8.379. ब्राह्मण वर्ग के व्यभिचार करने वाले व्यक्ति को मृत्यु-दंड न देकर अपकीर्तिकर उसका सिर मुंडवाने का विधान है, जबकि अन्य वर्ग के व्यक्ति के लिए मृत्यु-दंड तक का विधान है।

8.380. राजा ब्राह्मण का वध नहीं करेगा, चाहे उसने कितने ही भयंकर अपराध