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हिंदू समाज के आचार-विचार

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उठाता है तो उसे स्वयं वह ब्राह्मण दंड देगा, क्योंकि क्षत्रिय मूल रूप से ब्राह्मण

से ही पैदा हुआ है।

ब्राह्मण जब तक शस्त्रास्त्र न ग्रहण करे, तब तक क्षत्रिय को किस प्रकार दंडित कर सकता है? मनु इसे जानता था, अतः वह क्षत्रियों को दंडित करने के लिए ब्राह्मणों को शस्त्रास्त्र ग्रहण करने का अधिकार देता है।

12.100. वेदज्ञाता मनुष्य सेनापतित्व, राज्य, दंडप्रणेतृत्त्व (न्यायाधीश आदि होने)

और संपूर्ण लोकों के स्वामित्व के योग्य है।

मनु चातुर्वर्ण्य व्यवस्था का इतना प्रबल पक्षधर है कि उसने यह मौलिक परिवर्तन करने में कोई कमी नहीं रखी। ब्राह्मण द्वारा शास्त्रास्त्र ग्रहण करने का आग्रह एक मौ­ लिक परिवर्तन है जो मनु पूर्व विद्यमान नहीं था। ब्राह्मण द्वारा शस्त्रास्त्र ग्रहण न किए जाने का बड़ा कठोर नियम था। मनु पूर्व आपस्तम्ब धर्म सूत्र में यह नियम निम्नानुसार वर्णित हैः

1.10.29.6. ब्राह्मण अपने हाथ में चाहे उसे जांचने की ही इच्छा क्यों न हो शस्त्र

ग्रहण नहीं करेगा।

मनु के उत्तराधिकारी बौद्धायन ने अपने सूत्र में उसमें और संशोधन कियाः

2.24.18. गौ की रक्षा हेतु ब्राह्मण, अथवा वर्ण के विषय में भ्रांति होने पर ब्राह्मण

और वैश्य भी शस्त्रास्त्र ग्रहण कर सकते हैं, जो धर्म-सम्मत और हर कीमत पर

मान्य है।