240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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भगवत्गीता पर निबंधः
प्रतिक्रांति की दार्शनिक पुष्टिः
कृष्ण और उनकी गीता
‘एसेज आन दि भगवत्गीता’ (भगवत्गीता पर निबंध) के पहले पृष्ठ
पर डॉ. अम्बेडकर ने अपने हस्ताक्षर कर रखे हैं। अगले बयालीस पृष्ठों में
विराट पर्व और उद्योग पर्व पर विश्लेषणात्मक टिप्पणियां और इस निबंध
की विषय-सूची दी गई है। यह विषय-सूची पुस्तकों की योजना के अंतर्गत
मुद्रित है। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को
प्राप्त फाइल में ‘फिलासोफिक डिफेंस ऑफ काउंटर-रिवोल्यूशन - कृष्ण
एंड हिज गीता’ (प्रतिक्रांति की दार्शनिक पृष्टिः कृष्ण और उनकी गीता)
शीर्षक निबंध की टाइप की हुई दो प्रतियां मिली थीं। इस निबंध का
अंतिम वाक्य अपूर्ण मिला है। इस निबंध के टाइप किए गए पृष्ठों की
कुल संख्या चालीस है। विराट पर्व और उद्योग पर्व पर टिप्पणियां अगले
अध्यायों में सम्मिलित की गई हैं - संपादक
प्राचीन भारत के साहित्य में भगवत्गीता का क्या स्थान है? क्या यह हिंदू धर्म का उसी प्रकार का एक धर्मग्रंथ है, जिस प्रकार ईसाई धर्म की बाइबिल है। हिंदू इसे अपना धर्मग्रंथ मानते हैं। अगर यह धर्मग्रंथ है, तब यह वस्तुतः क्या शिक्षा देता है? यह किस सिद्धांत का प्रतिपादन करता है? इस विषय पर जो विद्वान कुछ कहने के लिए सक्षम हैं, उन्होंने इस प्रश्न के जो उत्तर दिए हैं, वे एक-दूसरे से इतने भिन्न हैं कि सचमुच आश्चर्य होता है। बोटलिंग्क ख्1, लिखते हैंः
- रिर्चड्स गार्बे द्वारा अपने इंट्रोडक्शन टू दि भगवत्गीता में उद्धृत (इंडियन एंटीक्वैरी 1918 परिशिष्टांक)।