गर्त में डूबा पुरोहितवाद
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उन्हें विभिन्न खेलों को खेलने तथा अन्य मनोरंजन करने का व्यसन था, जैसेः
आठ या दस चौखानों से बनी बिसात (चौपड़),
हवा में ऐसी बिसात की कल्पना करते हुए उसी प्रकार के खेलों का खेला
जाना,
- जमीन पर खींची गई लकीरों के ऊपर चलते रहना, जिससे प्रत्येक अपने
अपेक्षित निशान पर कदम रख सके,
- एक ढेरी में से नाखूनों के बल पर बिना हिलाए मोहरों अथवा मनुष्यों को
हटाना अथवा उन्हें ढेरी में रखना। जिससे ढेरी हिल जाती है वह हार जाता
है,
पासा फेंकना,
लंबी छड़ी से छोटी छड़ी पर प्रहार करना,
लाख अथवा लाल रंग अथवा गीले आटे में सभी अंगुलियों वाले हाथ को
पानी में डुबाना और गीले हाथ को जमीन पर मारना, पुकारकर कहना कि
‘यह क्या होगा’, और दिखाना कि यह शक्ल हाथी, घोड़ों आदि की होनी
चाहिए,
गेंदों से खेल खेलना,
पत्तों की बनी हुई खिलौने की बांसुरी बजाना,
खिलौने के हल से हल चलाना,
कलाबाजियां दिखाना,
ताड़ के पत्तों की खिलौना पवन चक्की बनाकर खेलना,
ताड़ के पत्तों का खिलौना माप बनाकर खेलना,
14-15. खिलौना गाडि़यों अथवा खिलौना धनुषों से खेलना,
- हवा में अथवा साथी खिलाड़ी की पीठ पर लिखे अक्षरों का पूर्वानुमान
लगाना,
साथी खिलाड़ी के विचारों का पूर्वानुमान लगाना, और
बहुरूपियापन।
उन्हें ऊंचे और बड़े आसनों को प्रयोग करने का व्यसन था, जैसेः
सचल पीठिकाएं, ऊंची और छह फुट लंबी (आसंदी),
तख्त जिसकी पीठ पर पशु आकृतियां खुदी हों (पल्लंको),
बकरी के लोमों वाली लंबी चादर (गोनाको),
रंगीन थेपली से बनाए गए पलंगपोश (कित्तका),
सफेद कंबल (पट्टिका),
फूलों की कढ़ाई युक्त ऊनी शैयावरण (पट्टालिका),
रूई से भरी हुई रजाइंया (तुलिका),