12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
- तोशक जिनमें शेर, बाघ आदि की आकृतियों की कढ़ाई की गई हो
(विकाटिका),
दोनों तरफ पशु लोम लगे हुए गलीचे (उद्दालोम),
एक तरफ पशु लोम लगे हुए गलीचे (इकंतालोमी),
रत्नजडि़त शैयावरण (कत्थीसम),
रेशमी शैयावरण (कोसीयम),
सोलह नर्तकियों के लिए पर्याप्त कालीनें (कुट्टाकम),
14-16. हाथी, घोड़े और रथ के नमदे,
- हिरण की खालों को सिलकर बनाए गए नमदे (अगिनापवेनी)
- दरियां, जिनके ऊपर तिरपाल लगे हों (सौटाराखदाम), और
- पीठिकाएं, जिनमें सिर और पैरों के लिए लाल तकिए हों।
ब्राह्मणों को सजने-संवरने तथा अपने-आपको सुंदर बनाने का व्यसन था, जैसेः
अपने शरीर पर सुगंधित चूर्ण मलना, उससे बाल धोना, और स्नान करना, पहलवान की तरह अंगों को गदाओं से थपथपाना, मालिश करना, दर्पण, आंखों में काजल आदि, पुष्पहारों, कुंकुमी, सौंदर्य प्रसाधनों, कंगन, कंठहारों, छडि़यों, औषधियों के लिए सरकंडे के खोलों, कटारों, सायेबान, कशीदाकारी की हुई चप्पलों, पगडि़यों, पुष्प किरीटों, याक की पूंछ की चंवरों और लंबी सफेद झालरदार पोशाकों का इस्तेमाल करना।
ब्राह्मणों को निम्न स्तर का वार्तालाप करने का व्यसन था, जैसेः
राजाओं, डाकुओं और राज्य के मंत्रियों के किस्से, युद्ध, आतंक और लड़ाइयों के वृतांत, खाद्य और पेय पदार्थों, वस्त्रों, बिस्तरों, फूलमालाओं, इत्रों के बारे में बातें करना, संबंध-संपर्कों, साज-सामान, गांवों, नगरों, शहरों और देशों के बारे में बातें करना, स्त्रियों और सूरमाओं की कहानियां सुनाना, गली के नुक्कड़ों अथवा पनघट की गपशप करना, भूतों की कहानियां सुनाना, बेढंगी बातें करना, पृथ्वी अथवा समुद्र के उद्भव के बारे में अथवा अस्तित्व व अनस्तित्व के बारे में अटकलबाजी करना।
ब्राह्मण विवादपूर्ण शब्दावली के प्रयोग के अभ्यस्त थे, जैसेः
तुम इस सिद्धांत और अनुशासन को नहीं जानते, मैं जानता हूं।
तुम इस सिद्धांत और विषय को कैसे जान पाओगे।
तुम गलत विचारों में फंस गए हो। मैं ही केवल सही हूं।
मैं सही बात बोल रहा हूं, तुम नहीं।
तुम पहले को बाद में रख रहे हो, और जो बाद में रखना चाहिए, वह पहले रख रहे हो।