गर्त में डूबा पुरोहितवाद
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तुमने उपाय निकालने में इतनी देर कर दी, इससे सब कुछ गड़बड़ हो गया है।
तुम्हारी चुनौती स्वीकार कर ली गई है।
तुम गलत सिद्ध हुए हो।
अपने विचारों को स्पष्ट बताओ।
अगर कर सकते हो तो अपने-आपको मुक्त करो।
ब्राह्मण संदेश ले जाने, दौत्य कार्य करने और राजाओं, राज्य के मंत्रियों, क्षत्रियों, ब्राह्मणों, अथवा युवा मनुष्यों के बीच यह कहते हुए मध्यस्थता करने के अभ्यस्त थे, ‘वहां जाओ, यहां आओ, यह अपने साथ ले जाओ, वहां से यह ले आओ।’
ब्राह्मण जो अपने लाभ की लालसा से प्रवंचक, प्रमादी (देने वालों के लिए पवित्र शब्दों के प्रयोग करने वाले), शगुनियां और ओझा का काम करते थे।
ब्राह्मण अपनी जीविका कमाने के लिए गलत साधन अपनाते थे और निम्न स्तर की कलाएं दिखाते थे, जैसेः
- हस्तरेखा विज्ञानµबच्चे के हाथों, पैरों आदि के निशान से दीर्घ जीवन, समृद्धि
आदि (अथवा उसके विपरीत) की भविष्यवाणी करना,
शकुनों अथवा लक्षणों से भविष्यवाणी करना,
बिजली की कड़क और खगोलीय स्थितियां देखकर शकुन-अपशकुन बताना,
स्वप्न की व्याख्या कर भविष्यवाणी करना,
शरीर के निशानों को देखकर भविष्यवाणी करना,
चूहों के कुतरे हुए कपड़ों के निशानों के आधार पर शकुन-अपशकुन
बताना,
अग्नि को बलि चढ़ाना,
चम्मच से आहुति देना,
9-13. देवताओं को भूसी_ भूसी और अनाज का आटा, उबालने योग्य भूसीयुक्त
अनाज, घी और तेल की भेंट चढ़ाना,
सरसों मुंह से उगलकर अग्नि में डालना,
देवताओं के लिए भेंट स्वरूप दाहिने घुटने से खून निकालना,
अंगुली की गांठें आदि देखकर मंत्र गुनगुनाने के बाद यह बताना कि अमुक
आदमी जन्म से भाग्यशाली है या नहीं,
- यह बताना कि जिस स्थान पर मकान अथवा क्रीड़ा-स्थल बनना है, वह शुभ
है या नहीं,
रीति-रिवाजों के नियमों के बारे में सलाह देना,
दुष्ट आत्माओं को समाधि-क्षेत्र में गिरा देना,