10. विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां - Page 283

268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. कौरवों की सेना देखकर उत्तर ने रथ छोड़ दिया और भागना प्रारंभ कर दिया। अर्जुन ने उसे रोक लिया। कौरवों ने यह देखकर संदेह करना प्रारंभ किया कि यह व्यक्ति अर्जुन होगा। अर्जुन ने उससे कहा कि इसमें भयभीत होने की कोई बात नहीं है।-(वही, अध्याय-38)

  2. अर्जुन अपना रथ शामी वृक्ष तक ले गाया। इसे देखकर द्रोण ने कहा कि इस व्यक्ति को अर्जुन ही होना चाहिए। यह सुनकर कौरव अधिक बेचैन हो गए। परंतु दुर्योधन ने कहा कि यदि द्रोण सही है, तो यह समाचार हमारे लिए सुखद है क्योंकि तेरहवें वर्ष से पूर्व ही पांडवों का पता लग गया है और उन्हें 12 वर्ष के लिए फिर वनवास का दंड भोगना पड़ेगा।-(वही, अध्याय-39)

  3. अर्जुन, उत्तर से शामी वृक्ष पर चढ़ने के लिए कहता है तथा शस्त्र नीचे डालने को कहता है।-(वही, अध्याय-40)

  4. उत्तर द्वारा शामी वृक्ष पर शव होने का संदेह करना।-(वही, अध्याय-41)

  5. शस्त्रों को देखकर उत्तर का हतप्रभ होना।-(वही, अध्याय-42)

  6. अर्जुन द्वारा शस्त्रों का वर्णन।-(वही, अध्याय-43)

  7. पांडवों के आवास के बारे में उत्तर की पूछताछ।-(वही, अध्याय-44)

  8. वृक्ष से उतरते हुए उत्तर।-(वही, अध्याय-45)

  9. हनुमान के चिह्न के साथ रथ। द्रोण इस बात से आश्वस्त हो जाते है कि वह अर्जुन ही है। कौरवों की सेना को अपशकुन दिखाई देते हैं।-(वही, अध्याय-46)

  10. दुर्योधन सैनिकों को प्रोत्साहित करता है, जो द्रोण के यह कहने पर भयभीत हो गए थे कि वह अर्जुन है। द्रोण के प्रति कर्ण की भर्त्सना और दुर्योधन को यह सुझाव कि द्रोण को मुख्य सेनापति के पद से हटा दिया जाए।-(वही, अध्याय-47)

  11. कर्ण ने गर्व से यह घोषित किया और प्रतिज्ञा की कि वह अर्जुन को परास्त कर देगा।-(वही, अध्याय-48)

  12. कृपाचार्य ने कर्ण को आत्मश्लाघी बनने और गर्व दिखाने पर चेतावनी दी। शास्त्रों द्वारा युद्ध को बुरा माना गया है।-(वही, अध्याय-49)

  13. अश्वत्थामा कर्ण और दुर्योधन की भर्त्सना करता है, क्योंकि उन्होंने द्रोण की झूठी निंदा की है।-(वही, अध्याय-50)

  14. अश्वत्थामा ने कर्ण और दुर्योधन को अपशब्द कहे, क्योंकि उन्होंने द्रोण की निंदा की। कर्ण ने उत्तर दिया, ‘अंततोगत्वा मैं केवल सूत हूं।’ परंतु अर्जुन ने उसी प्रकार दुर्व्यवहार किया है, जिस प्रकार राम ने बाली के साथ किया था।-(वही, अध्याय-50)