विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां
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भीष्म, द्रोण और कृप द्वारा अश्वत्थामा को चुप करा दिया गया तथा दुर्योधन और कर्ण ने द्रोण से क्षमा याचना की।-(वही, अध्याय-51)
भीष्म का निर्णय कि पांडवों ने अपने बनवास के 13 वर्ष पूरे कर लिए हैं।-(वही, अध्याय-52)
अर्जुन ने कौरवों की सेना को परास्त कर दिया।-(वही, अध्याय-53)
अर्जुन कर्ण के भ्राता को पराजित करता है। अर्जुन, कर्ण को हराता है और कर्ण भाग जाता है।-(वही, अध्याय-54)
अर्जुन कौरवों की सेना का विनाश कर देता है तथा कृपाचार्य के रथ का विध्वंस कर देता है।-(वही, अध्याय-55)
देवता लोग आकाश में आ गए और उन्होंने अर्जुन तथा कौरवों की सेना के बीच घमासान युद्ध देखा। -(वही, अध्याय-56)
कृप और अर्जुन के मध्य युद्ध और कृप का युद्ध के मैदान से भाग जाना।-(वही, अध्याय-57)
द्रोण और अर्जुन के मध्य युद्ध और द्रोण का युद्ध के मैदान से भाग जाना।-(वही, अध्याय-58)
अश्वत्थामा और अर्जुन के मध्य युद्ध।-(वही, अध्याय-59)
कर्ण और अर्जुन के मध्य युद्ध।-(वही, अध्याय-60)
अर्जुन द्वारा भीष्म पर आक्रमण।-(वही, अध्याय-61)
अर्जुन कौरवों के सैनिकों को मौत के घाट उतारता है।-(वही, अध्याय-62)
भीष्म की पराजय और उसका युद्ध के मैदान से पलायन।-(वही, अध्याय-64)
कौरवों के सैनिकों का मूर्छित हो जाना। भीष्म का यह कहना कि वे अपने गृह को लौट जाएं।-(वही, अध्याय-66)
कौरव सैनिक अभय से अर्जुन के समक्ष आत्म-समर्पण करते हुए। उत्तर और अर्जुन विराट नगरी लौट आते हैं।-(वही, अध्याय-67)
विराट अपनी राजधानी में प्रवेश करता है तथा प्रजा उसका सम्मान करती है।-(वही, अध्याय-68)
पांडव सम्राट की सभा में प्रवेश करते हैं।-(वही, अध्याय-69)
अर्जुन अपने भाइयों का परिचय विराट से करवाता है।-(वही, अध्याय-71)