10. विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां - Page 284

विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां

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  1. भीष्म, द्रोण और कृप द्वारा अश्वत्थामा को चुप करा दिया गया तथा दुर्योधन और कर्ण ने द्रोण से क्षमा याचना की।-(वही, अध्याय-51)

  2. भीष्म का निर्णय कि पांडवों ने अपने बनवास के 13 वर्ष पूरे कर लिए हैं।-(वही, अध्याय-52)

  3. अर्जुन ने कौरवों की सेना को परास्त कर दिया।-(वही, अध्याय-53)

  4. अर्जुन कर्ण के भ्राता को पराजित करता है। अर्जुन, कर्ण को हराता है और कर्ण भाग जाता है।-(वही, अध्याय-54)

  5. अर्जुन कौरवों की सेना का विनाश कर देता है तथा कृपाचार्य के रथ का विध्वंस कर देता है।-(वही, अध्याय-55)

  6. देवता लोग आकाश में आ गए और उन्होंने अर्जुन तथा कौरवों की सेना के बीच घमासान युद्ध देखा। -(वही, अध्याय-56)

  7. कृप और अर्जुन के मध्य युद्ध और कृप का युद्ध के मैदान से भाग जाना।-(वही, अध्याय-57)

  8. द्रोण और अर्जुन के मध्य युद्ध और द्रोण का युद्ध के मैदान से भाग जाना।-(वही, अध्याय-58)

  9. अश्वत्थामा और अर्जुन के मध्य युद्ध।-(वही, अध्याय-59)

  10. कर्ण और अर्जुन के मध्य युद्ध।-(वही, अध्याय-60)

  11. अर्जुन द्वारा भीष्म पर आक्रमण।-(वही, अध्याय-61)

  12. अर्जुन कौरवों के सैनिकों को मौत के घाट उतारता है।-(वही, अध्याय-62)

  13. भीष्म की पराजय और उसका युद्ध के मैदान से पलायन।-(वही, अध्याय-64)

  14. कौरवों के सैनिकों का मूर्छित हो जाना। भीष्म का यह कहना कि वे अपने गृह को लौट जाएं।-(वही, अध्याय-66)

  15. कौरव सैनिक अभय से अर्जुन के समक्ष आत्म-समर्पण करते हुए। उत्तर और अर्जुन विराट नगरी लौट आते हैं।-(वही, अध्याय-67)

  16. विराट अपनी राजधानी में प्रवेश करता है तथा प्रजा उसका सम्मान करती है।-(वही, अध्याय-68)

  17. पांडव सम्राट की सभा में प्रवेश करते हैं।-(वही, अध्याय-69)

  18. अर्जुन अपने भाइयों का परिचय विराट से करवाता है।-(वही, अध्याय-71)