विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां
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द्रुपद अपने पुरोहित को निर्देश देता है कि उसे सभा में किस प्रकार बोलना है तथा इस मामले को सुलझाना है।-(वही, अध्याय-6)
अर्जुन और दुर्योधन, दोनों ही द्वारका जाते हैं तथा युद्ध के लिए उनसे सहायता की याचना करते हैं। उसने कहा कि वह उन दोनों की सहायता करेगा। मैं एक को अपनी सेना दे सकता हूँ और दूसरे के साथ अकेला रह सकता हूँ। आप यह चुनें कि आपको क्या चाहिए। दुर्योधन ने सेना को चुना। अर्जुन ने कृष्ण को चुना।-(वही, अध्याय-7)
शल्य का बृहद् सेना के साथ पांडवों के पास आना। दुर्योधन उसे निम्न वर्ग का मानता है। शल्य और पांडवों की बैठक। पांडव शल्य से निवेदन करते हैं कि युद्ध में कर्ण को हतोत्साहित किया जाए। शल्य के साथ समझौता।-(वही, अध्याय-8)
अध्याय-9-असंगत।
अध्याय-10-असंगत।
अध्याय-11-असंगत।
अध्याय-12-असंगत।
अध्याय-13-असंगत।
अध्याय-14-असंगत।
अध्याय-15-असंगत।
अध्याय-16-असंगत।
अध्याय-17-असंगत।
अध्याय-18-असंगत।
सात्यकी अपनी सेना सहित पांडवों के पास आता है और भागदत्ता दुर्योधन के पास जाता है।-(वही, अध्याय-19)
द्रुपद का पुरोहित कौरवों की सभा में प्रवेश करता है। पुरोहित ने कहा कि पांडव कौरवों के कुकृत्यों को भूल जाने के लिए तैयार हैं और उनके साथ संधि करना चाहते हैं। उसने बताया कि पांडवों के पास भारी सेना है फिर भी वे संधि करना चाहते हैं।-(वही, अध्याय-20)
भीष्म पुरोहित का समर्थन करता है। कर्ण आपत्ति करता है। भीष्म और कर्ण के बीच वाद-विवाद। धृतराष्ट्र सुझाव देता है कि संजय को उनकी ओर से समझौता करने के लिए भेजा जाए।-(वही, अध्याय-21)
धृतराष्ट्र संजय को पांडवों के पास भेजता है और उससे कहता है कि इस