274 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अध्याय-52)
धृतराष्ट्र धर्म और उसके मित्रों के पराक्रम का विचार करता है। वह अपने पुत्रों से कहता है कि वे पांडवों के साथ संधि कर लें।-(वही, अध्याय-53)
संजय कौरवों की पराजय की भविष्यवाणी करता हे।-(वही, अध्याय-54)
दुर्योधन कहता है कि पांडव हमें पराजित नहीं कर सकते, क्योंकि हमारा सैन्य-बल अधिक है।-(वही, अध्याय-55)
संजय पांडवों द्वारा सेना की सुव्यवस्था का वर्णन करता है।-(वही, अध्याय-56)
संजय यह बताता है कि पांडवों ने कौरवों के योद्धाओं को मौत के घाट उतारने की किस प्रकार की योजना तैयार की है। दुर्योधन कहता है कि वह पांडवों से भयभीत नहीं है कि वे कौरवों को पराजित कर देंगे। कौरवों के पास अधिक सेना है।-(वही, अध्याय-57)
धृतराष्ट्र दुर्योधन से कहता है कि वह युद्ध न करे। दुर्योधन शपथ लेता है कि वह युद्ध से विमुख न होगा। धृतराष्ट्र रो पड़ता है।-(वही, अध्याय-58)
धृतराष्ट्र संजय से कहता है कि वह उसे बताए कि कृष्ण और अर्जुन के बीच क्या वार्तालाप हुआ?-(वही, अध्याय-59)
धृतराष्ट्र ने दुर्योधन को बताया कि देवता पांडवों की सहायता करेंगे और कौरवों का विनाश कर देंगे।-(वही, अध्याय-60)
दुर्योधन कहता है कि वह इससे भयभीत नहीं है।-(वही, अध्याय-61)
कर्ण कहता है कि वह स्वयं अर्जुन का वद्य करने में सक्षम है।-(वही, अध्याय-62)
दुर्योधन कहता है कि वह कर्ण पर निर्भर होकर युद्ध कर रहा है और उसे भीष्म, द्रोण आदि पर उतना विश्वास नहीं है।-(वही, अध्याय-63)
विदुर दुर्योधन से कहता है कि शत्रुता त्याग दे।-(वही, अध्याय-64)
धृतराष्ट्र दुर्योधन की भर्त्सना करता है।-(वही, अध्याय-65)
संजय अर्जुन का संदेश धृतराष्ट्र को बताता है।-(वही, अध्याय-66)
जो सम्राट कौरवों के सभागार में एकत्र हुए थे, से अपने-अपने गृहों को लौट गए। व्यास और गांधारी विदुर के साथ आते है। व्यास ने संजय से कहा कि वह धृतराष्ट्र को वह सभी बताए, जो उसे कृष्ण के वास्तविक स्वरूप और अर्जुन के बारे में ज्ञात