10. विराट पर्व और उद्योग पर्व की विश्लेषणात्मक टिप्पणियां - Page 291

276 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. सहदेव कृष्ण से मिलता है तथा कहता है कि कौरवों के साथ युद्ध किया जाए। सात्यकी ने कहा कि यहां जितने भी योद्धा एकत्र हुए हैं, वे सभी सहदेव के विचार से सहमत हैं।-(वही, अध्याय-81)

  2. द्रोपदी कृष्ण से भेंट करती है और उन्हें बताती है कि वह तब तक संतुष्ट नहीं होगी, जब तक दुर्योधन का विनाश नहीं हो जाता। कृष्ण उसे आश्वासन देते हैं।-(वही, अध्याय-82)

  3. अर्जुन और कृष्ण के बीच अंतिम बैठक होती है। अर्जुन क्षमा, अर्थात् शांति के लिए भरसक प्रयत्न करता है। युधिष्ठिर कृष्ण से कहते हैं कि कुंती को आश्वासन दिया जाए। कृष्ण अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए जाते हैं।-(वही, अध्याय-83)

  4. कृष्ण जब हस्तिनापुर जाते हैं, तो मार्ग में उन्हें अच्छे और बुरे शकुन होते दिखाई पड़ते हैं।-(वही, अध्याय-84)

  5. दुर्योधन कृष्ण के लिए हस्तिनापुर की यात्रा में स्थान-स्थान पार विश्रामालय बनवाते हैं।-(वही, अध्याय-85)

  6. धृतराष्ट्र विदुर से पूछते हैं कि कृष्ण को कौन-कौन से उपहार दिए जाएं।-(वही, अध्याय-86)

  7. विदुर धृतराष्ट्र से कहते हैं कि वह कृष्ण को पांडवों से अलग नहीं मानते।-(वही, अध्याय-87)

  8. दुर्योधन का कहना है कि कृष्ण पूज्य हैं। परन्तु यह समय नहीं है कि उनकी पूजा की जाए। भीष्म दुर्योधन से कहते हैं कि पांडवों के साथ समझौता कर लिया जाए। दुर्योधन की इच्छा कृष्ण से साक्षात्कार करने की है। भीष्म दुर्योधन का घोर विरोध करता है।-(वही, अध्याय-88)

  9. कृष्ण हस्तिनापुर में प्रवेश करते हैं। धृतराष्ट्र से भेंट। वे विदुर के यहां ठहरते हैं।-(वही, अध्याय-89)

  10. कुंती और कृष्ण की भेंट । कुंती अपने दुःख से आहत है, कृष्ण उसको सांत्वना देते हैं। कुंती कृष्ण से कहती हैः (1) मेरे पुत्रों से कहो कि वे अपने साम्राज्य के लिए युद्ध करें। (2) मैं द्रौपदी के लिए दुःखी हूं।-(वही, अध्याय-90)

  11. कौरव कृष्ण को भोजन करने के लिए बुलाते हैं। कृष्ण इंकार कर देते हैं। कृष्ण विदुर के साथ भोजन करते हैं।

  12. विदुर कृष्ण से कहता है कि वह नहीं चाहता कि कृष्ण कौरवों के बीच जाएं।-(वही, अध्याय-92)