ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय
283
‘इंद्राणी ने नहुष से कहा - ‘हे देवताओं के राजा, मैं चाहती हूं कि आपका वाहन ऐसा हो जो सर्वथा नवीन हो जैसा न विष्णु के पास हो, न रुद्र के पास और न ही असुरों और राक्षसों के पास। हे देव! सभी प्रमुख ऋषि परस्पर मिलकर आपकी पालकी उठाएं। इससे मुझे सुख मिलेगा। नहुष ने गर्व में भरकर इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया और अपनी प्रशंसा करते हुए उसने यह उत्तर दियाµ ‘मैं इतना निर्बल नहीं हूं कि जो ऋषि मुनियों को अपनी पालकी का वाहक न बना सकूं। मैं महाशक्ति का अनन्य भक्त हूं, भूत, भविष्य और वर्तमान का स्वामी हूं। यदि मैं कु्रद्ध हो जाऊं तो पृथ्वी ठहर नहीं सकती। सब कुछ मुझ पर निर्भर है.... इसलिए हे देवी! तुम जो कहती हो उसे मैं पूरा करूंगा। सप्तऋषि और सभी ब्रह्मऋषि मुझे ढोएंगे। हे सुंदरी! मेरा प्रताप और मेरा ऐश्वर्य देखना।’ तदनुसार उस दुरात्मा, अधर्मी, अत्याचारी, मदांध, स्वेच्छाचारी ने ऋषियों को अपने वाहन में जोत दिया और चलने का आदेश दिया। इंद्राणी तब फिर बृहस्पति के पास गई। उन्होंने उसे आश्वासन दिया कि नहुष अपनी क्रोधाग्नि से स्वयं भस्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि मैं आततायी के इस विनाश और इंद्र के छिपने के स्थान का पता लगाने के लिए स्वयं एक यज्ञ करूंगा।
‘इसके बाद इंद्र की खोज करने और उन्हें बृहस्पति के पास लाने के लिए अग्नि को भेजा गया। बृहस्पति ने इंद्र को आने पर बताया कि उसकी अनुपस्थिति में क्या-क्या हुआ। जिस समय इंद्र कुबेर, यम, सोम और वरुण के साथ नहुष के विनाश की बात सोच रहे थे, तभी अगस्त्य ऋषि आए और इंद्र को उसके प्रतिद्वंद्वी के पतन की सूचना देकर बधाई दी। उन्होंने इस प्रकार कहाः ‘पापी नहुष को ढोते हुए जब देवता और शुभ्र ब्राह्मण ऋषिगण थकने लगे तो उन्होंने नहुष से एक कठिनाई हल करने के लिए कहाः वासव! आप सभी योद्धाओं में श्रेष्ठ हैं। क्या आप उन ब्राह्मण मंत्रों को श्रेष्ठ स्वीकार करते हैं, जो पशुओं की बलि के समय पढ़े जाते हैं? ‘नहीं’ नहुष ने कहा। उसकी मति भ्रष्ट हो गई थी। ऋषियों ने प्रतिवाद किया और कहा - ‘तुमने अधर्म में फंसकर धर्म-परायणता गंवा दी है। हम इन मंत्रों को श्रेष्ठ समझते है।, जिनका हमारे पूर्व-महर्षि पाठ करते थे। तब (अगस्त्य ने आगे कहा) नहुष ने अधर्म से प्रेरित होकर मेरे सिर पर लात मारी। इसके परिणामस्वरूप राजा का गौरव समाप्त हो गया और उसका ऐश्वर्य विलीन हो गया। वह तुरंत घबरा उठा और भयाक्रांत हो उठा। मैंने उससे कहा, अरे बेवकूफ, तूने उन ब्राह्मण मंत्रों का निरादर किया है जो प्राचीन ऋषियों द्वारा रचे गए हैं और जो ब्राह्मण ऋषियों के द्वारा प्रयुक्त होते रहे हैं। तूने मेरे सिर पर लात मारी है। तूने ब्राह्मण ऋषियों से चाकरी करवाई है और अपने ढोने के लिए ऋषियों से पालकी उठवाई है। तेरी कुवासना के फलस्वरूप तेरे सारे पुण्य नष्ट हो गए हैं। तेरा पतन हो जाए तू स्वर्ग से गिरकर पृथ्वी पर जा और सहस्त्रों वर्षों तक एक अजगर के रूप में जीवन बिता। जब यह अवधि समाप्त होगी, तू स्वर्ग में आ सकेगा।’ इस प्रकार वह पापी देवताओं के राजा के पद से च्युत हो गया। हे इंद्र! अब हमें सुखी