292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
की तरफ चढ़ने लगा, पृथ्वी टूटकर पाताल की ओर जाने लगी। इन दोनों के युद्ध से अनेक जीवों की मृत्यु हो गई। इस भयंकर अव्यवस्था को देखकर वहां सभी देवताओं सहित ब्रह्मा उपस्थित होते हैं और दोनों प्रतिद्वंद्वियों को युद्ध बंद करने का आदेश देते हैं। इस आदेश पर दोनों को भयंकर क्रोध हो उठता है, लेकिन ब्रह्मा उनको उनके मूल रूप में प्रतिष्ठित कर देते हैं और परस्पर शांति रखने की सलाह देते हैं।
एक अन्य प्रकरण जिसमें ये एक-दूसरे के विरोधी दिखाए गए हैं, अयोध्या के राजा अम्बरीष से संबंधित है। कथा इस प्रकार हैः ख्1,
अम्बरीष एक यज्ञ करा रहा था तो इंद्र बलि पात्र को उठा ले गया। पुरोहित ने कहा कि यह एक अमंगल है जो प्रगट करता है कि राजा का शासन कुशासन-ग्रस्त है और इसके लिए बहुत बड़े प्रायश्चित की जरूरत है, और वह प्रायश्चित है, मानव की बलि। काफी तलाश के बाद राजर्षि अम्बरीष एक ब्रह्मर्षि ऋचीक के पास गए, जो भृगु के वंशज थे। अम्बरीष ने ऋचीक से कहा कि वह बलि के लिए अपना एक पुत्र बेच दे, जिसके लिए उन्हें एक लाख गाएं दी जाएंगी। ऋचीक ने उत्तर दिया कि वह अपने ज्येष्ठ पुत्र को नहीं बेचेंगे, उनकी पत्नी ने कहा कि वह छोटे बेटे को नहीं बेचेगी। उसने कहा कि बड़े पुत्र पर सामान्यतः पिता का दुलार होता है और छोटे पर माता का। तब मझले पुत्र शुनःशेप ने कहा कि इस प्रकार तो उसी को बेचा जाना है और राजा से कहा कि वह उसे ले चलें। एक लाख गाय, एक करोड़ स्वर्ण मुद्राएं, ढेर सारे आभूषण शुनःशेप के बदले में दिए गए। जब वे पुष्कर होकर जा रहे थे, तो अपने मामा विश्वामित्र से मिले जो अन्य ऋषियों के साथ वहां यज्ञ कर रहे थे। शुनःशेप उनकी गोदी में गिर पड़ा और उसने अपने मामा से अपनी विवशता का वर्णन करते हुए दया की भीख मांगी।
‘विश्वामित्र ने उसे सांत्वना दी और अपने पुत्रों पर इस बात के लिए दबाव डाला कि उनमें से कोई एक शुनःशेप के स्थान पर बलि चढ़ जाए। इस प्रस्ताव पर मधुसयंद और राजर्षि के दूसरे पुत्र सहमत न हुए। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि आप यह कैसे कह सकते हैं कि आपका अपना पुत्र बलि चढ़ जाए और उसके स्थान पर किसी अन्य को बचा लिया जाए? हम इसे ठीक नहीं समझते। यह इसी प्रकार हुआ जैसे कि कोई अपना ही मांस खाए। राजर्षि को इस पर बड़ा क्रोध आया और उन्होंने अपने पुत्रों को शाप दिया कि वे अत्यंत नीच जातियों में पैदा हों, जैसे वशिष्ठ के पुत्र उत्पन्न हुए हैं और वे हजारों वर्षों तक कुत्ते का मांस खाएं। तब उन्होंने शुनःशेप से कहा कि जब तुम रस्सियों से बंध जाओ, तुम्हारे गले में लाल डोरी पड़ी हो, जब तुम्हें सुगंधित लेप चढ़ाए जाएं और जब विष्णु के बलि स्तंभ के निकट ले जाया जाए, तब तुम अग्नि से प्रार्थना करना और अम्बरीष के यज्ञ में इन दो श्लोकों को पढ़ना। तुमको सफलता मिलेगी।
- म्यूर, खंड 1, पृ. 405-407