ब्राह्मण बनाम क्षत्रिय
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गया हो, चाहे वह भोजन करता हो या व्रत रखता हो, रेशमी टाट लपेट कर रहता हो या मृग चर्म धारण किए हुए हो, वह सांसारिक को दैविक और दैविक को सांसारिक बना सकता है, कु्रद्ध होने पर वह नई सृष्टि कर सकता है। ब्राह्मण देवाधिदेव हैं और कारणों के कारण हैं। अज्ञानी ब्राह्मण भी देवता है और ज्ञानी ब्राह्मण तो देवताओं से बढ़कर हैं, जैसे विशाल महासागर है।
इन सब तथ्यों से यह बड़ा ही रहस्यपूर्ण लगता है कि ब्राह्मणों का अचानक पतन, क्षत्रियों को जीतने के लिए उनका यह असफल प्रयास क्योंकर हुआ? इस रहस्य का कारण क्या हो सकता है?