304 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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शूद्र और प्रतिक्रांति
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को
मूल अंग्रेजी की पांडुलिपि में फुलस्केप टाइप किए हुए इक्कीस पृष्ठ
प्राप्त हुए थे। प्रथम पृष्ठ पर शीर्षक ‘शूद्राज एंड दि काउंटर रिवोल्यूशन’
(शूद्र और प्रतिक्रांति) दिया गया है और आगे के पृष्ठों पर सामग्री
इसी शीर्षक से शुरू होती है। ये सभी पृष्ठ बिखरे और एक-दूसरे से
नत्थी किए हुए मिले हैं। दुर्भाग्य से केवल इक्कीस पृष्ठ उपलब्ध हैं
और बाद के पृष्ठ लगता है कि खो गए हैं - संपादक
शूद्रों की स्थिति के विषय में मनु के नियम अध्ययन के लिए एक बहुत ही रोचक विषय हैं। इसका सीधा-सा कारण यह है कि इन नियमों ने हिंदुओं की मनोवृत्ति को ढाला और शूद्रों के प्रति उनके दृष्टिकोण को निर्धारित किया, जो इस समय और हर युग में सबसे अधिक संख्या में हिंदू समाज के अंग रहे हैं। इन नियमों को नीचे अलग-अलग शीर्षकों में वर्णित किया गया है, जिससे पाठकों को उस स्थिति की पूरी-पूरी जानकारी मिल सके, जो मनु ने शूद्रों के समाज को दी है।
4.61. मनु ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य गृहस्थों को आदेश देता है - ‘वे उस
देश में न रहें जहां शासक शूद्र हों’। शूद्र सम्मानित व्यक्ति नहीं समझा जाए,
क्योंकि मनु नियम बताता हैः
9.24. ब्राह्मण कभी भी यज्ञ (करने) के लिए, अर्थात् धार्मिक कार्यों के लिए शूद्र
से कभी भी धन नहीं मांगेगा। शूद्रों के साथ वैवाहिक संबंध प्रतिबंधित थे। शेष
तीन वर्णों में से किसी भी वर्ण की नारी के साथ विवाह निषिद्ध था। उच्च वर्ण
की नारी के साथ शूद्र को कोई भी संबंध रखने का अधिकार नहीं था और उसके
साथ यदि कोई शूद्र जार कर्म करता है, तो इस अपराध के लिए मनु ने उसे मृत्यु
दंड का प्रावधान किया है।