शूद्र और प्रतिक्रांति
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मनु इतने से ही संतुष्ट नहीं है। वह कहता है कि शूद्र का यह निम्न स्तर इस वर्ण के व्यक्तियों के नामों और उपनामों में परिलक्षित हो। मनु कहता हैः
2.31. ब्राह्मण के नाम का प्रथम अंश मंगल सूचक, क्षत्रिय का शक्ति सूचक, वैश्य
का धन सूचक, और शूद्र का कुछ ऐसा हो जो तिरस्कार सूचक हो।
2.32. ब्राह्मण के नाम का द्वितीयांश सुख-शांति सूचक, क्षत्रिय का रक्षा सूचक, वैश्य
का सौभाग्य सूचक और शूद्र का दास भाव सूचक होगा।
मनु से पहले शूद्रों की क्या स्थिति थी? मनु शूद्रों का निरूपण इस प्रकार करता है, जैसे वे बाहर से आने वाले अनार्य थे। किंतु उन्हें वे सामाजिक अथवा धार्मिक अधिकार प्राप्त नहीं होने चाहिए। दुर्भाग्य तो यह है कि लोगों के मन में यह धारणा घर कर गई है कि शूद्र अनार्य थे। किंतु इस बात में कोई संदेह नहीं है कि प्राचीन आर्य साहित्य में इस संबंध में रंच मात्र भी कोई आधार प्राप्त नहीं होता।
जब हम आर्यों के धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं, तब हमें उनमें विभिन्न समुदायों और वर्गों का नामोल्लेख मिलता है। सर्वप्रथम आर्यों का उल्लेख मिलता है, जिनमें चार वर्ग कहे गए हैं, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। इनके अतिरिक्त और इनसे भिन्न थे (1) असुर, (2) सुर अथवा देव, (3) यक्ष, (4) गंधर्व, (5) किन्नर, (6) चारण, (7) अश्विनी, और (8) निषाद।
निषाद जंगल के निवासी थे और आदिम और असंस्कृत थे। गंधर्व, यक्ष, किन्नर, चारण और अश्विनी वर्ग के समुदाय थे। असुर शब्द प्रजातीय नाम है, जो विभिन्न जनजातियों के लिए दिया गया। ये जनµजातियां अपने-अपने विशिष्ट नामों से पुकारी जाती हैं, जैसे दैत्य, दानव, दस्यु, कलंज, कलेय, कालिन, नाग, निवात-कवच, पुलोम, पिशाच और राक्षस। हम यह नहीं कह सकते कि सुर और देव भी असुर की भांति विभिन्न जन-जातियों के नाम थे। हम केवल देव समुदायों के प्रमुख देवों को जानते हैं। इनमें से जो अधिक प्रसिद्ध हैं, वे हैं - ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, सूर्य, इंद्र, वरुण और सोम आदि।
इन जातियों, अर्थात् आर्यों, असुरों और देवों के और इनके बीच परस्पर संबंध के बारे में अनेक विलक्षण मान्यताएं मुख्यतः सायणाचार्य के भाष्य की भ्रांतिपूर्ण व्याख्या के कारण ज्ञानवान व्यक्तियों तक के मन में भी बैठ गई हैं। यह विश्वास किया जाता है कि असुर मानव नहीं थे। उन्हें भूत-पिशाच समझा गया है, जो आर्यों को रात होने पर सताया करते थे। सुर अथवा देव प्रकृति की शक्तियों के काव्यात्मक प्रतीक कहे गए, आर्यों के संबंध में यह धारणा है कि वे गोरे रंग के, नुकीली नाक वाले, गौर वर्ण के मनुष्य थे और उसमें इसका बहुत अभिमान था। दस्युओं के बारे में कहा गया है कि शूद्र का दूसरा नाम दस्यु है। यह भी कहा गया है कि शूद्र भी भारत के आदि निवासी थे।