12. शूद्र और प्रतिक्रांति - Page 323

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इनका रंग काला और नाक चपटी होती थी। जब आर्यों ने भारत पर आक्रमण किया तो उन्होंने इन्हें पराजित कर दिया और इन्हें अपना दास बना लिया और दासता के चिह्न के रूप में इन्हें ‘दस्यु’ नाम दिया। कहा जाता है कि ‘दस्यु’ शब्द दास शब्द से निकला है, जिसका अर्थ है, गुलाम। ख्1,

ये सारी धारणाएं निराधार हैं। असुर और सुर, दोनों आर्यों के समान मनुष्य थे। असुर और सुर, दोनों के पिता कश्यप थे। कथा है कि दक्ष प्रजापति की साठ कन्याएं थीं, जिनमें से तेरह कन्याओं का विवाह कश्यप के साथ हुआ था। कश्यप की तेरह पत्नियों में से एक दिति और दूसरी थी, अदिति। जो दिति से उत्पन्न हुए, वे दैत्य अथवा असुर कहलाए और जिनका जन्म अदिति से हुआ, वे सुर अथवा देव कहलाए। इन दोनों के बीच बहुत दिनों तक पृथ्वी पर आधिपत्य के लिए भीषण युद्ध हुआ। इसमें संदेह नहीं कि यह एक पौराणिक कथा है। बेशक, यह पौराणिक कथा है, लेकिन यह भी एक इतिहास है और पौराणिक इतिहास अतिशयोक्ति में कहा गया इतिहास ही होता है।

आर्य कोई प्रजाति नहीं थी। आर्य कुछ व्यक्तियों का एक समूह था। उनको आपस में बांधे रखने का सूत्र एक विशिष्ट संस्कृति को बनाए रखने में उनका स्वार्थ था, जिसे आर्य संस्कृति कहा जाता है। जो भी व्यक्ति आर्य संस्कृति को स्वीकार कर लेता, वह आर्य कहलाता था। चूंकि यह कोई प्रजाति नहीं थी, अतः इसके लिए वर्ण और आकृति का कोई मापदंड नहीं था, जिसे आर्य कहा जा सकता। आर्यों में काले रंग और चपटी नाक वाला कोई वर्ग ऐसा नहीं था, जो अपने आपको उनसे भिन्न कहता हो। ख्2,

आर्यों और दस्युओं में विभाजन और परस्पर वैर वर्ण के प्रति पूर्वाग्रह के कारण रहा यह धारणा वर्ग और अनास्, इन दो शब्दों के गलत अर्थ लगाए गए जाने के कारण पैदा हुई, जिनका प्रयोग दस्युओं के प्रसंग में किया गया। ‘वर्ण’ शब्द का अर्थ रंग और अनास् का अर्थ बिना नाक वाला लगाया गया। ये दोनों अर्थ गलत हैं। वर्ण का अर्थ जाति और अनास् को यदि संधि-विच्छेद करें, अर्थात् अन$आस पढ़ें तो इसका अर्थ होगा, मुख या आकृति रहित। यह कहना कि आर्यों में वर्ण के प्रति पूर्वाग्रह था जिसके कारण इनकी पृथक सामाजिक स्थिति बनी, कोरी बकवास होगी। अगर कोई ऐसे लोग थे जिनमें वर्ण के प्रति कोई पूर्वाग्रह नहीं था, तो वह आर्य थे और यह इसलिए था कि इनका कोई प्रमुख वर्ण नहीं था, जिसके आधार पर वे अपने को अलग-अलग रखते।

यह कहना गलत है कि दस्यु प्रजाति के कारण अनार्य थे। दस्यु भारत की आर्यों

  1. निरुक्त के अनुसार दास का अर्थ है नष्ट करना।

  2. इस संपूर्ण विषय पर पुरुषार्थ खंड, पृ. 13 पर श्री सातवलेकर का सिद्धांतपूर्ण विवेचन देखिए।