शूद्र और प्रतिक्रांति
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से पूर्व की कोई आदिम जाति भी नहीं थी। दस्यु आर्य संप्रदाय के सदस्य थे किंतु उन्हें कुछ ऐसी धारणाओं और आस्थाओं का विरोध करने के कारण आर्य संज्ञा से रहित कर दिया गया जो आर्य संस्कृति का आवश्यक अंग थी। इस धारणा का कि दस्यु प्रजाति के कारण अनार्य हैं, कैसे जन्म हुआ, यह समझना कठिन है।
ऋग्वेद में इंद्र कहते हैं कि ‘मैंने कवि नामक व्यक्ति के हितार्थ अपने वज्र से संहार किया है, मैंने सुरक्षा के साधनों का उपयोग कर कूप की सुरक्षा की है, मैंने संरक्षण के साधनों से कूप को बचाया है, मैंने सुष्न के संहार के लिए वज्र का उपयोग किया, मैंने दस्युओं को आर्य की संज्ञा से वंचित किया।’ (ऋग्वेद, 10.49)
इंद्र के इस कथन से अधिक सकारात्मक और निश्चित प्रमाण और कोई नहीं हो सकता कि दस्यु आर्य ही थे। इसके अतिरिक्त एक और प्रमाण, अनेक अत्याचारों के कारण इंद्र को दंडित किया जाना भी है। इंद्र को जिन अत्याचारों के कारण दंडित किया गया, उसमें से एक यह भी है कि इंद्र ने वृत्र का वध किया था। वृत्र दस्युओं का नायक था। यदि दस्यु आर्य न होते तो इंद्र पर ऐसा आरोप लगाना अकल्पनीय है।
यह सोचना भी गलत है कि आर्य आक्रमणकारियों ने शूद्रों पर विजय प्राप्त की। पहली बात तो यह है कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं मिलता कि आर्य भारत में बाहर से आए और उन्होंने यहां के निवासियों पर आक्रमण किया था। इस बात की पुष्टि के लिए प्रचुर प्रमाण हैं कि आर्य भारत के मूल निवासी थे। दूसरी बात यह है कि इस बात का कहीं कोई प्रमाण नहीं मिलता कि आर्यों और दस्युओं के बीच कभी कोई युद्ध हुआ हो, और दस्युओं का शूद्रों से कोई लेना-देना नहीं था। तीसरी बात यह है कि इस बात पर विश्वास करना कठिन है कि आर्य कोई शक्तिशाली लोग थे, जिनके पास पर्याप्त बल था। जो कोई भारत में आर्यों का इतिहास देवों के साथ उनके संबंध के प्रसंग में पढ़ता है, उसे उनके उस संबंध का स्मरण हो जाता है जो सामंती युग में सामंत और उनके अधीनों के बीच होते थे। देव सामंत होते थे और आर्य उनके अधीन थे। आर्य लोग जो आहुतियां देते थे, उनका स्वरूप कुछ ऐसा ही है, जैसे देवों को शुल्क दिया जा रहा हो। देवों के प्रति आर्यों की अधीनता का कारण यह था कि उनके संरक्षण के बिना वे असुरों से अपनी रक्षा नहीं कर सकते थे। इस प्रकार यह कल्पना करना कठिन है कि ऐसे अशक्त लोगों ने शूद्रों पर विजय प्राप्त की थी। अंतिम बात यह है कि शूद्रों के विषय में दो बातें स्पष्ट हैं। इस बात से कोई सहमत नहीं है कि उनका रंग काला और नाक चपटी थी। न ही किसी ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे आर्यों द्वारा कभी पराजित किए गए या गुलाम बनाए गए थे। आर्यों और दस्युओं को एक ही मानना गलत बात है। वे बराबर के लोग थे। किंतु सांस्कृतिक रूप में वे एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न थे। ख्1, दस्यु इस अर्थ में अनार्य थे कि वे अलग हो गए और उन्होंने आर्य-संस्कृति का विरोध किया। दूसरी ओर, शूद्र आर्य ही थे, अर्थात् वे जीवन की आर्य-पद्धति में