314 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
धारण करने का प्रश्न है, इस बात का कहीं कोई प्रमाण नहीं मिलता कि यह शूद्रों के लिए वर्जित था। बल्कि संस्कार गणपति में इस बात का स्पष्ट प्रावधान है और कहा गया है कि शूद्र उपनयन के अधिकारी हैं। ख्1,
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यद्यपि शूद्र निम्न वर्ग में गिने जाते थे, तथापि मनु से पहले वे समाज में स्वतंत्र नागरिक थे। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दिए गए निम्नलिखित प्रावधान पर विचार कीजिएः
फ्जो संबंधी जन (ऐसे) शूद्र का, जो जन्मजात दास नहीं है और जन्म से आर्य हैं, विक्रय करते हैं या उन्हें गिरवी रखते हैं, उनको दो पण का आर्थिक दंड दिया जाए।य्
फ्जो कोई किसी दास को उसका धन लेकर ठगता है अथवा उसे उन विशेषाधिकारों से वंचित करता है जो वह आर्य (आर्यभव) होने के कारण प्रयोग कर सकता है, (उसे) (उसका) आधा आर्थिक दंड दिया जाए, जो किसी को आर्य को दास बनाने पर दिया जाता है।य्
फ्यदि कोई अपेक्षित धन मिल जाने पर किसी दास को मुक्त नहीं करता है, तब उसे बारह पण दंड दिया जाए, किसी दास को अकारण बंदी बनाकर रखने पर (संरोधश्चकारणात्) इतना ही दंड दिया जाए।य्
फ्किसी भी ऐसे व्यक्ति की संतति आर्य मानी जाएगी, जिसने अपने आपको दास रूप में बेच दिया है। प्रत्येक दास अपने स्वामी के कृत्यों के बावजूद उसका भी अधिकारी होगा जो उसे उत्तराधिकारी स्वरूप प्राप्त होगी।य्
मनु ने शूद्रों को क्यों दबाया?
शूद्रों के संबंध में यह पहेली कोई सरल पहेली नहीं है। यह एक जटिल पहेली है। आर्यों ने हमेशा अनार्यों को आर्य बनाने का प्रयत्न किया। अर्थात् उन्हें आर्य संस्कृति का अनुयायी बनाने का प्रयत्न किया। उनमें अनार्यों को आर्य बनाए जाने की इतनी उत्कट इच्छा थी कि उन्होंने अनार्यों को सामूहिक आधार पर आर्य बनाने के लिए एक धार्मिक समारोह की कल्पना की। इस समारोह का नाम व्रात्य स्तोम था। व्रात्य स्तोम के संबंध में महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री का कथन हैः
फ्जिस संस्कार द्वारा व्रात्यों का शुद्धिकरण किया जाता था, जिसका वर्णन पंच विंश ब्राह्मण में किया गया है, वह कम से कम एक रूप में तो वैदिक कालीन अन्य संस्कारों से भिन्न था, अर्थात् अन्य संस्कारों में यज्ञ मंडप में केवल एक व्यक्ति और उसकी पत्नी यजमान होते थे, किंतु इस संस्कार में हजारों व्यक्ति यजमान होते थे। इनमें से एक
- मैक्समूलर द्वारा एनसिएंट संस्कृत लिटरेचर (1860) में पृ. 207 पर उल्लिखित है।