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शूद्र और प्रतिक्रांति

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  1. जब धर्म का नाश होता है, तब उसके साथ सारे संसार का नाश हो जाता है। जब वेन ने इस प्रकार ऋषियों द्वारा प्रताडि़त और संबोधित किए जाने पर भी अपनी अनुमति नहीं दी, तब सभी मुनि असंतुष्ट होकर कु्रद्ध हो चिल्लाने लगे, ‘मार डालो, इस पापी को मार डालो।’

  2. यह नीच कर्म करने वाला व्यक्ति जो ईश्वर की, जो आदि और अनंत परमेश्वर की निंदा करता है, पृथ्वी पर राज्य करने योग्य नहीं है। इस प्रकार कहकर मुनियों ने इस राजा को अपने हाथों में कुश लेकर शाप दिया, जो ईश्वर की निंदा करने और अन्य पाप कर्मों के लिए पहले से ही शाप-ग्रस्त था। इसके बाद मुनियों ने अपने चारों ओर धूल उड़ती देखी और जो लोग उनके पास खड़े थे, उनसे वे, जो कुछ हुआ, उसके बारे में बोले।

  3. उन्हें बताया गया कि इस राज्य में जहां कोई राजा नहीं है, लोग त्रस्त होने के कारण डाकू बन गए हैं और दूसरों की संपत्ति छीनने लगे हैं।

  4. यह धूल उन डाकुओं के कारण उड़ रही हैं, जो आवेश में आकर भाग रहे हैं और दूसरे व्यक्तियों की संपत्ति लूट रहे हैं। तब सभी मुनियों ने एक-दूसरे से परामर्श कर राजा की जांघ को रगड़ा जो निःसंतान था, जिससे एक पुत्र का जन्म हुआ जो लकड़ी के जले हुए कुंदे के समान था, जिसकी मुखाकृति चपटी थी और जो कद में बहुत ही छोटा था।

  5. यह व्यक्ति व्यथित होकर ब्राह्मणों से बोला, ‘मेरे लिए क्या आज्ञा है।’ उन्होंने उससे कहा, बैठ जाओ (निषीथ) और इससे वह निषाद बन गया।

  6. इससे निषादों का जन्म हुआ, जो विन्ध्यपर्वत पर रहते हैं और अपने कू्रर कर्मों के लिए कुख्यात हैं।

  7. इस प्रकार राजा का पाप उसके शरीर को त्याग कर बाहर आया और इस प्रकार निषादों की उत्पत्ति हुई, जो वेन की कू्ररता की संतान है।’

निषादों की उत्पत्ति के बारे में यह एक पौराणिक उल्लेख है, किंतु यह ऐतिहासिक तथ्य भी है। इससे यह प्रमाणित होता है कि निषाद निम्न वर्गीय और आदिम जातियां थीं, जो विन्ध्य पर्वत पर जंगलों में रहती थीं। ये कू्रर तथा दुष्ट लोग थे, अर्थात् जो आर्य संस्कृति के विद्वान थे। उन्होंने अपनी उत्पत्ति के संबंध में एक पौराणिक आख्यान गढ़ लिया और अपने-आपको आर्य संप्रदाय से जोड़ दिया। यह सब कुछ इसलिए किया गया कि निषादों को आर्यों के दल से, न कि आर्यों के समाज से जोड़ लेने के लिए प्रमाण मिल सकें। अब कहीं भी निषादों को नीच, असंस्कृत और विदेशी जनजाति कहकर कोई रोक नहीं लगाई जाती। प्रश्न यह है कि शूद्रों पर सारी रोक क्यों लगाई जाती है जो सुसंस्कृत थे और आर्य थे?