318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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नारी और प्रतिक्रांति
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सोर्स मैटिरियल पब्लिकेशन कमेटी को इस लेख की एक ऐसी प्रति उपलब्ध हुई, जिस पर शीर्षक ‘दि वूमेन एंड दि काउंटर-रिवोल्यूशन’ (नारी और प्रतिक्रांति) दिया हुआ है। इस लेख की दूसरी प्रति भी कमेटी को उपलब्ध हुई है, लेकिन उसका शीर्षक है ‘दि रिडिल ऑफ दि वूमेन’ (नारी एक पहेली)। कमेटी के सदस्यों का विचार है कि इस लेख को ‘रिडिल्स इन हिंदूइज्म’ (हिंदू धर्म की पहेलियां) शीर्षक से आगामी अंग्रेजी प्रकाशन के बजाए प्रस्तुत खंड में शामिल किया जाए, तो उचित होगा - संपादक
कहा जा सकता है कि मनु शूद्रों के प्रति जितना अनुदार था, स्त्रियों के प्रति भी उसके विचार उतने ही अनुदार थे। स्त्रियों के प्रति हीन विचारों से वह आरंभ करता है। मनु घोषणा करता हैः
2.213. इस संसार में स्त्रियों का स्वभाव पुरुषों को मोहित करता है। इस कारण बुद्धिमान जन स्त्रियों के बीच सुरक्षित नहीं रहते।
2.214. क्योंकि स्त्रियां इस संसार में केवल मूर्ख को ही नहीं, बल्कि विद्वानों को भी पथभ्रष्ट करने में और उन्हें काम और क्रोध का दास बना देने में सक्षम हैं।
2.215. कोई किसी की माता, बहन या पुत्री के साथ एकांत में न बैठे क्योंकि इंद्रियां शक्तिशाली होती हैं और विद्वान को भी अपने वश में कर लेती हैं।
9.14. स्त्रियां रूप की अपेक्षा नहीं करतीं, न उनका ध्यान आयु पर रहता है, यह सोचकर कि (यह ही पर्याप्त है कि) वह पुरुष है, सुंदर या कुरूप के साथ संभोग कर बैठती हैं।
9.15. इस संसार में उनकी चाहे जितनी भी रक्षा क्यों न की जाए, पुरुषों के प्रति काम-भावना, अपनी चंचल प्रकृति और अपनी स्वाभाविक हृदयहीनता के कारण वह अपने पति के प्रति निष्ठारहित हो जाती हैं।