320 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डाल देते हैं कि मनु ने विवाह को संस्कार की तरह माना है और इसलिए उसने विच्छेद की अनुमति नहीं दी। यह बात निश्चय ही सत्य से कोसों दूर है। मनु के विच्छेद-नियम का बिल्कुल भिन्न उद्देश्य था। यह पुरुष को स्त्री से बांध देने की बात नहीं, बल्कि यह स्त्री को पुरुष से बांध देने और पुरुष को स्वतंत्र रखने की बात थी, क्योंकि मनु पुरुष को अपनी पत्नी को त्याग देने से नहीं रोकता। वस्तुतः वह उसे अपनी पत्नी को छोड़ देने की ही अनुमति नहीं, बल्कि उसे बेच देने की भी अनुमति देता है। वह पत्नी को स्वतंत्र न होने देने के लिए नियम बनाता है। देखिए मनु क्या कहता हैः
9.46. बेचने और त्याग देने से कोई स्त्री अपने पति से मुक्त नहीं होती।
इसका अर्थ यह है कि कोई स्त्री बेचे या त्याग दिए जाने से किसी दूसरे व्यक्ति की, जिसने उसे खरीद लिया है या त्याग देने के बाद प्राप्त किया है, वैध पत्नी नहीं हो सकती। अगर यह असंगत नहीं है तो कुछ भी असंगत नहीं हो सकता। लेकिन मनु अपने नियम के परिणामस्वरूप होने वाले न्याय या अन्याय के बारे में चिंतित नहीं था। वह स्त्री को उस स्वतंत्रता से वंचित कर देना चाहता था, जो उसे बौद्ध काल में थी। वह यह जानता था कि स्त्री द्वारा अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग करने या शूद्र के साथ विवाह करने की उसकी इच्छा होने से वर्ण-व्यवस्था नष्ट हो गई थी। मनु स्त्री की स्वतंत्रता से कु्रद्ध था और उसे रोकने में उसने उसकी स्वतंत्रता से उसे वंचित कर दिया।
संपत्ति के मामले में पत्नी का स्थान मनु द्वारा दास के स्तर पर लाकर पटक दिया गया।
8.416. पत्नी, पुत्र और दास, इन तीनों के पास कोई संपत्ति नहीं हो_ वे जो संपत्ति
अर्जित करें, वह उसकी होती है, जिसकी वह पत्नी या पुत्र या दास है।
अगर वह विधवा हो जाए, तब मनु उसके लिए निर्वाह-व्यय की अनुमति देता है और अगर उसका पति अपने परिवार से अलग था, तब उसे उसके पति की संपत्ति में से विधवा को भूसंपत्ति का अधिकार देता है लेकिन मनु उसे संपत्ति पर अधिकार की अनुमति नहीं देता।
मनु के नियमों के अधीन स्त्री को शारीरिक दंड दिया जा सकता है और मनु पति को अपनी पत्नी को मारने-पीटने की अनुमति देता हैः
8.299. स्त्री, पुत्र, दास और सहोदर यदि अपराध करें तब रस्सी से या बांस की
छड़ी से मारना चाहिए।
अन्य परिस्थितियों में मनु स्त्री का स्थान शूद्र के स्थान के समान मानता है। वेद का अध्ययन मनु द्वारा उसे उसी प्रकार निषिद्ध है जिस प्रकार शूद्र को।