322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
अब उन विशिष्ट सूत्रों पर ध्यान दीजिए जो उस आदर्श के मानों आधार हैं, जिसे मनु स्त्रियों के लिए प्रस्तुत करता हैः
5.153. जिस पति ने किसी स्त्री को अपनी पत्नी के रूप में पवित्र मंत्रों के उच्चारण
के बाद वरण किया है, वह उसके लिए ऋतुभिन्न-काल में भी नित्य ही इस लोक
में तथा परलोक में सुख देने वाला होता है।
5.150. उसे सर्वदा प्रसन्न, गृह कार्य में चतुर, घर के बर्तनों को स्वच्छ रखने में
सावधान तथा खर्च करने में मितव्ययी होना चाहिए।
अब जरा, मनु के समय से पूर्व नारी की जो स्थिति थी, उससे इसकी तुलना तो कीजिए। अथर्ववेद से यह स्पष्ट है कि नारी को अपने उपनयन का अधिकार प्राप्त था। कहा गया है कि नारी ब्रह्मचर्य की अवस्था पूरी करने के बाद विवाह के योग्य हो जाती है। श्रौत सूत्र से यह स्पष्ट है कि नारी वेद मंत्रों का अनुपाठ कर सकती थी और उसे वेदों का अध्ययन करने के लिए शिक्षा दी जाती थी। पाणिनि की अष्टाध्यायी से इस बात के भी प्रमाण मिलते हैं कि नारियां गुरुकुलों में जाती थीं और वेदों की विभिन्न शाखाओं का अध्ययन करती थीं और वे मीमांसा में प्रवीण होती थीं। पतंजलि के महाभाष्य का कहना है कि नारियां शिक्षक होती थीं और बालिकाओं को वेदों का अध्ययन कराती थीं। धर्म, आध्यात्म और तत्व मीमांसा के कठिन से कठिन विषयों पर पुरुषों के साथ नारियों के शास्त्रार्थ करने के प्रसंग भी कम नहीं मिलेंगे। जनक और सुलभ, याज्ञवल्क्य और गार्गी, याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी तथा शंकराचार्य और विद्याधरी के बीच शास्त्रार्थ की घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि मनु के पूर्व नारियां शिक्षा और ज्ञान के उच्च शिखर पर पहुंच चुकी थीं।
मनु से पूर्व नारी को बहुत सम्मान दिया जाता था, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। प्राचीन काल में राजाओं के राज्याभिषेक के समय में जिन स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी, उनमें रानी भी होती थी। राजा दूसरों की भांति रानी को भी वर प्रदान करता था। ख्1, राज्याभिषेक के पूर्व चयनित राजा केवल रानी की ही नहीं वरन् वह नीची जाति की अपनी अन्य पत्नियों की भी स्तुति करता था। ख्2, इसी प्रकार वह राज्याभिषेक के बाद अपने प्रमुख शासनाधिकारियों की पत्नियों का भी अभिवादन करता था। ख्3,
कौटिल्य के युग में नारी बारह वर्ष की अवस्था में और पुरुष सोलह वर्ष की अवस्था में वयस्क माने जाते थे। ख्1, यही आयु विवाह की आयु मानी जाती थी। बौद्धायन
जायसवालµइंडियन पॉलिटी, भाग 2, पृ. 16
वही, पृ. 17
वही, पृ. 82