13. नारी और प्रतिक्रांति - Page 341

326 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण वर्ण की जो पत्नियां हैं और जिनके संतान उत्पन्न नहीं हुई हैं वे क्रमशः एक, दो, तीन और चार वर्ष तक प्रतीक्षा करें क्योंकि उनके पति अल्प समय के लिए परेदश गए हुए हैं और जिन्होंने बच्चों को जन्म दिया हो, वे अपने अनुपस्थित पति की एक वर्ष से अधिक समय तक प्रतीक्षा करें। यदि उन्हें भरण-पोषण की राशि दी गई हो तो उन्हें उक्त अवधि से दुगने समय तक प्रतीक्षा करनी चाहिए यदि उन्हें भरण-पोषण की व्यवस्था नहीं की गई है, तो उनके संपन्न जाति (नातेदारों) को उनका भरण-पोषण चार से आठ वर्ष तक करना चाहिए। तब परिजन को चाहिए कि वह उनसे उस संपत्ति को वापस लेकर विवाह के लिए मुक्त कर दें, जो उन्हें विवाह के अवसर पर प्रदान की गई थी। यदि पति ब्राह्मण है और वह परदेश में अध्ययन कर रहा है, तो उसकी पत्नी को जिसके कोई बच्चा नहीं है, उसकी प्रतीक्षा दस वर्ष तक करनी चाहिए। किंतु यदि उसके बच्चे हैं, तो बारह वर्ष तक प्रतीक्षा करे। यदि कोई पति राजा का कर्मचारी है तो उसकी पत्नी, उसकी आजीवन प्रतीक्षा करे और यदि उसने किसी सवर्ण (अर्थात् दूसरा पति जो उसी गोत्र का है जिसका पूर्व पति था) से संतान को जन्म दिया है, जिससे उसका (नारी का) वंश समाप्त होने से बच जाए, तो वह नारी ऐसा करने से निंदा की पात्र नहीं होगी। यदि अनुपस्थित पति की पत्नी के पास भरण-पोषण नहीं है और उसके संपन्न जाति (नातेदारों) ने उसकी उपेक्षा कर दी है तो उस पुरुष के साथ अपना पुनर्विवाह कर सकती है, जिसे वह पसंद करती है तथा जो उसका भरण-पोषण कर सकता हो, उसे कष्टों से मुक्ति दिला सकता हो।’

यहां मनु के विपरीत विवाहिता नारी को आर्थिक स्वाधीनता सुनिश्चित की गई थी। वह कौटिल्य के अर्थशास्त्र में पत्नी की स्थाई निधि और उसके भरण-पोषण के संबंध में दी गई व्यवस्था से स्पष्ट है, जो इस प्रकार हैः

‘जिसे नारी की संपत्ति कहा जाता है, उसमें जीविका के साधन (वृत्ति) या आभूषण (अवघ्य) शामिल है। जीविका के जिन साधनों का मूल्य दो हजार से अधिक है, वह (उसके नाम) स्थाई निधि हैं। आभूषणों की कोई सीमा नहीं है। यदि कोई पत्नी संपत्ति का उपयोग अपने पुत्र, अपनी पुत्र-वधू और स्वयं पर करती है और जबकि पति ने उसके भरण-पोषण का कोई प्रबंध न किया हो, तब वह किसी अपराध की भागी नहीं होगी। प्राकृतिक आपदा, व्याधि और अकाल के समय खतरों से बचने के लिए और दान-दक्षिणा के लिए पति भी उस संपत्ति का उपयोग कर सकता है। जिस दंपति के जुड़वां बच्चे हुए हों, वह यदि परस्पर सहमति से इस संपत्ति का उपयोग करें, तो इनमें से किसी के विरुद्ध कोई शिकायत नहीं होगी। तब भी किसी शिकायत को स्वीकार नहीं किया जाएगा, जब इस संपत्ति का उपयोग तीन वर्ष तक उन लोगों ने किया हो, जिनका विवाह पहली चार पद्धतियों के अनुसार हुआ हो, किंतु गंधर्व विवाह और असुर विवाह