बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स
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शुरू कर दिया। इसे पूरा करने के बाद वह उसे बुद्ध के पास ले गईं और उसे पहनने के लिए कहा। परंतु उन्होंने यह कहकर इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि यदि यह एक उपहार है, तो उपहार समूचे संघ के लिए होना चाहिए, संघ के एक सदस्य के लिए नहीं। उन्होंने बहुत अनुनय-विनय की, परंतु उन्होंने (बुद्ध ने) उसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया, वह बिल्कुल नहीं माने।
भिक्षु संघ का संविधान सबसे अधिक लोकतंत्रात्मक संविधान था। वह इन भिक्षुओं में से केवल भिक्षु थे। अधिक से अधिक वह मंत्रिमंडल के सदस्यों के बीच एक प्रधानमंत्री के समान थे। वह तानाशाह कभी नहीं थे। उनकी मृत्यु से पहले उनको दो बार कहा गया कि वह संघ पर नियंत्रण रखने के लिए किसी व्यक्ति को संघ का प्रमुख नियुक्त कर दें। परंतु हर बार उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया कि धम्म संघ का सर्वोच्च सेनापति है। उन्होंने तानाशाह बनने और तानाशाह नियुक्त करने से इंकार कर दिया।
साधनों का मूल्य क्या है? किसके साधन अंततः श्रेष्ठ तथा स्थाई हैं?
क्या साम्यवादी यह कह सकते हैं कि अपने मूल्यवान साध्य को प्राप्त करने में उन्होंने अन्य मूल्यवान साध्यों को नष्ट नहीं किया है? उन्होंने निजी व्यक्तिगत संपत्ति को नष्ट किया है। यह मानकर कि यह एक मूल्यवान साध्य है, क्या साम्यवादी यह कह सकते हैं कि उसे प्राप्त करने की प्रक्रिया में उन्होंने अन्य मूल्यवान साध्यों को नष्ट नहीं किया है? अपने साध्य व लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने कितने लोगों की हत्या की है? क्या मानव जीवन का कोई मूल्य नहीं है? क्या वे संपत्ति को उसके स्वामी का जीवन लिए बिना उससे नहीं ले सकते?
तानाशाही को लीजिए। तानाशाही का साध्य व लक्ष्य क्रांति को एक स्थाई क्रांति बनाना होता है। यह एक मूल्यवान साध्य है। परंतु क्या साम्यवादी यह कह सकते हैं। कि इस साध्य को उपलब्ध करने के लिए उन्होंने अन्य मूल्यवान साध्यों को नष्ट नहीं किया हैं? तानाशाही के बारे में यह कहा गया है कि इसमें स्वतंत्रता और संसदीय सरकार का प्रायः अभाव होता है, अर्थात् दोनों व्याख्याएं पूर्णतया स्पष्ट नहीं हैं। स्वतंत्रता का अभाव तो संसदीय सरकार में भी होता है, क्योंकि कानून का अभिप्राय होता है, स्वतंत्रता का अभाव। इसी में तानाशाही तथा संसदीय सरकार का अंतर निहित है। संसदीय सरकार में प्रत्येक नागरिक को अपनी स्वतंत्रता पर सरकार द्वारा थोपे गए बंधनों की आलोचना करने का पूरा अधिकार होता है। संसदीय सरकार में आपके कुछ कर्तव्य तथा कुछ अधिकार होते हैं। आपका कर्तव्य है कि आप कानून का पालन करें और यह अधिकार है कि उसकी आलोचना करें। तानाशाही में आपका केवल कर्तव्य होता है कि आप कानून का पालन करें, परंतु आपको उसकी आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं होता है।