346 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
किसके साधन आधिक प्रभावोत्पादक व अमोघ हैं
अब हमें इस बात पर विचार करना है कि किसके साधन अधिक टिकाऊ तथा स्थाई हैं। हमें बल प्रयोग तथा नैतिक प्रवृत्ति पर आधारित सरकार के बीच चयन करना होगा।
बर्क ने कहा है कि बल-प्रयोग स्थाई साधन नहीं हो सकता। अमरीका के साथ सहमति के संबंध में उसने यह अविस्मरणीय चेतावनी दी थीः
‘‘महादेय, पहले मुझे यह बात कहने की अनुमति दीजिए कि एकमात्र बल
का प्रयोग केवल अस्थाई होता है। यह कुछ समय के लिए किसी को वश में
ला सकता है, परंतु यह उसे पुनः वश में करने की आवश्यकता को समाप्त
नहीं करता। और किसी भी ऐसे राष्ट्र पर शासन नहीं किया जा सकता जिस पर
बार-बार विजय के लिए चढ़ाई करनी पड़े।य्
‘‘मेरी अगली आपत्ति इसकी अनिश्चितता के संबंध में है। बल-प्रयोग का
परिणाम हमेशा आतंक नहीं होता और युद्ध-सामग्री विजय नहीं होती। आप
साधन-विहीन हैं, क्योंकि समझौता असफल होने पर बल बना रहता है। परंतु यदि
बल-प्रयोग असफल हो जाए, तो समझौते की कोई आशा नहीं रहती। शक्ति तथा
सत्ता कभी-कभी दया से भी प्राप्त कि जा सकती है। परंतु अशक्त तथा पराजित
हिंसा के द्वारा उसकी कभी भीख नहीं मांगी जा सकती।य्
‘‘बल-प््रायोग के बारे में मेरी अगली आपत्ति यह है कि आप अपने लक्ष्य को अपने ही प्रयत्नों से धूल-धूसरित कर देते हैं, जो आप उसे अक्षत बनाने के लिए करते हैं। आपने जिस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पहले संघर्ष किया था, वह आपको पुनः मिल तो जाता है, लेकिन वह इस कारण तुच्छ, गलित, अपशिष्ट और छीनी हुई वस्तु सरीखा होता है।य्
बुद्ध ने भिक्षुओं को अपने एक प्रवचन में न्यायसंगत शासन तथा कानून के शासन के बीच अंतर दर्शाया है। भिक्षुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहाः
(2) बंधुओं, बहुत समय पहले स्त्रात्रय (स्ट्रांग टायर)नामक एक प्रभुसत्ता
संपन्न अधिपति था। वह एक ऐसा राजा था, जो धर्मपरायणता से शासन करता
था। वह पृथ्वी की चारों दिशाओं का स्वामी, विजेता तथा अपनी जनता का रक्षक
था। उसके पास दिव्य चक्र था। वह समुद्र पर्यंनत पृथ्वी प्र परमाधिकारपूर्वक रहता
था। उसने इस पर विजय प्राप्त की थी, साहस से नहीं, तलवार से नहीं, बल्कि
धर्मपरायणता से।