14. बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स - Page 362

बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स

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(3) अब बंधुओं, बहुत वर्षों के बाद, सैकड़ों वर्षों के बाद, मनु के हजार वर्षों बाद, राजा स्त्रात्रय ने किसी व्यक्ति को आदेश दिया और यह कहा कि ‘महोदय, आप यह देखें कि दिव्य चक्र थोडा-सा ध्ांस गया है, वह अपने स्थान से नीचे की ओर सरक गया है। इसक विषय में आप मुझे आकर बताइए।’

सैकड़ों वर्षों के बाद वह अपने स्थान से सरक गया। इसे देखने के बाद वह व्यक्ति राजा स्त्रात्रय के पास गया और कहा- ‘महाराज यह सच मानिए कि दिव्य चक्र धंस गया है, वह अपने स्थान से सरक गया है।’

ब्ांधुओं, राजा स्त्रात्रय ने अपने बड़े राजकुमार को बुलाया और उससे इस प्रकार कहाः ‘प्रिय पुत्र, देखो, मेरा दिव्य चक्र थोड़ा-सा धंस गया है। वह अपने स्थान से सरक गया है। मुझे यह बताया गया है कि चक्र को घुमाने वाले राजा का दिव्य चक्र जब धंस या झुक जाएगा, वह अपने स्थान से सरक जाएगा, तब वह राजा और अधिक समय तक जीवित नहीं रहेगा। मैंने मानव-जीवन के सब सुख व आनंद भोग लिए हैं, अब ईश्वरीय आनंद की खोज करने का समय है। प्रिय पुत्र, आओ, तुम महासागर से घिरी इस पृथ्वी का कार्यभार संभालो। परंतु मैं अपने सिर व दाढ़ी का मुंडन कराकर तथा पीले वस्त्र पहनकर घर को छोड़कर यहां से गृह-विहीन हो जाऊंगा।’

इस प्रकार, बंधुओ, राजा स्त्रात्रय ने उपयुक्त ढंग से अपने बड़े पुत्र को सिंहासन पर बिठा दिया । अपने सिर तथा दाढ़ी का मुंडन कराया, पीले वस्त्र पहने और वह उसी समय गृह-विहीन हो गया। जब वह राजा संन्यासी होकर चला गया, तब उसके सातवें दिन दिव्य चक्र भी लुप्त हो गया।

(4) तब कोई व्यक्ति नए राजा के पास गया और उसे बतायाः ‘महाराज, आप यह सच मानिए, दिव्य चक्र वास्तव में लुप्त हो गया है।’

इसके बाद, बंधुओ वह राजा इस बात को सुनकर शोक संतप्त, दुःखी एवं विक्षुब्ध हो गया। वह संन्यासी राजा के पास गया और उसको यह बतायाः ‘महाराज, यह सही जानिए कि दिव्य चक्र लुप्त हो गया है।’

‘और उस नए अभिषिक्त राजा के यह कहने पर, संन्यासी राजा ने उत्तर दिया- प्रिय पुत्र, तुम अब इस बात पर दुःखी मत हो कि दिव्य चक्र लुप्त हो गया है, और न इस बात पर विषाद करो, क्योंकि प्रिय पुत्र, दिव्य चक्र तुम्हारी कोई पैतृक संपत्ति नहीं है। परंतु, प्रिय पुत्र, चक्र प्रवर्तक बनने का प्रयत्न करो (संसार में सच्चे राजाओं ने अपने लिए जो आदर्श, कर्तव्य स्वयं निर्धारित किए है, तुम उन आदर्शों के अनुसार कार्य करो)। फिर हो सकता है कि अगर तुम चक्र प्रवर्तक राजा के श्रेष्ठ कर्तव्य कर रहे होंगे, तब चंद्र पर्व के दिन जब तुम