14. बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स - Page 368

बुद्ध अथवा कार्ल मार्क्स

353

उसके बाद, इन तीन चीजों की वृद्धि से माता तथा पिता के प्रति पुत्रोचित श्रद्धा-भक्ति का अभाव, पवित्र व्यक्तियों के प्रति धार्मिक निष्ठा का अभाव व कुल के प्रधान के प्रति आदर व सम्मान का अभाव हो गया।

(19) बंधुओ, एक समय आएगा, जब उन मानवों के वंशजों के जीवन की अवधि दस वर्ष की हो जाएगी। इस जीवन-अवधि वाले मानवों में पाँच वर्ष की कुमारियां विवाह योग्य आयु की हो जाएंगी। ऐसे मानवों में इस प्रकार की रुचियों (स्वाद), जैसे घी, मक्खन, तिल का तेल, चीनी, नमक का लोप हो जाएगा। ऐसे मानवों में कुदरुसा अनाज सर्वोत्तम किस्म का भोजन होगा। इसलिए उस समय कुदरुसा ऐसे किस्म का अनाज होगा, जैसे आजकल चावल (भात) और दाल आदि है। ऐसे मानवों के बीच आचार के दस नैतिक आचरणों का बिल्कुल लोप हो जाएगा। और कार्य के दस अनैतिक मार्ग अत्यधिक प्रचलित हो जाएंगे, ऐसे मानवों के बीच नैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं होगा, उनमें नैतिकता बहुत कम रह जाएगी, ऐसे मानवों के बीच, बंधुओ, जिन लोगों में पुत्र-भाव तथा धार्मिक निष्ठा का अभाव होगा, और जो अपने कुल के प्रधान के प्रति सम्मान नहीं दिखाएंगे, उन लोगों को उसी तरह की आदर श्रद्धा तथा प्रशंसा प्रदान की जाएगी, जैसी श्रद्धा तथा प्रशंसा आज पुत्र-भाव वाले, पावन मनोवृत्ति वाले तथा कुल के प्रधान को आदर करने वाले व्यक्तियों को प्रदान की जाती है।

(20) बंधुओ, ऐसे मानवों में माता या माता की बहन (मौसी), मां की भाभी (मामी), गुरू की पत्नी या पिता की भाभी जैसे (आदरपूर्ण विचार जो अंतर्विवाह के बंधन स्वरूप होते है) नहीं होंगे। संसार भेड़-बकरियों, मुर्गेµमुर्गियों, सुअरों, कुत्तों ओर गीदड़ों की तरह स्वच्छंद संभोग में लिप्त हो जाएगा।

बंधुओ, ऐसे मानवों में माता में अपने बच्चे के प्रति, बच्चे में अपने पिता के प्रति, भाई में भाभी के प्रति, भाई में बहन के प्रति, बहन में भाई के प्रति पारस्परिक शत्रुता, दुर्भावना, वैर-भाव, हत्या करने तक के क्रोधपूर्ण विचार नियम बन जाएंगे। जैसा कि एक खिलाड़ी उस खेल के प्रति महसूस करता है, जिसे वह देखता है, उसी प्रकार से वे भी महसूस करेंगे।

जब नैतिक बल असफल हो जाएगा और उसके स्थान पर पाशविक बल आ जाएगा तब क्या होगा, संभवतः यह उस स्थिति का सबसे उत्तम चित्र है। बुद्ध यह चाहते थे कि प्रत्येक व्यक्ति नैतिक रूप में इतना प्रशिक्षित होना चाहिए कि वह स्वयं ही धर्मपरायणता व न्यायसंगतता का प्रहरी हो जाए।