4. सुधारक और उनकी नियति - Page 39

24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

केवल यदाकदा होने वाले दंगे नहीं थे। यह संघर्ष एक-दूसरे को मिटा देने के संघर्ष थे। परशुराम, जो एक ब्राह्मण थे, क्षत्रियों से इक्कीस बार लड़े और प्रत्येक क्षत्रिय को उन्होंने मार डाला।

वैसे ये दोनों वर्ग सर्वश्रेष्ठता के लिए आपस में लड़ रहे थे, फिर भी दोनों वैश्यों और शूद्रों को वश में रखने के लिए एक थे। वैश्य दूध देने वाली गाय के समान थे। उनका कार्य केवल कर चुकाना था। आमतौर पर शूद्र भार-स्वरूप जानवर थे। इन दो वर्गों का एकमात्र उद्देश्य ब्राह्मण व क्षत्रियों को गौरवमय बनाना और खुशहाल रखना था। उन्हें अपने जीने के कोई अधिकार नहीं थे। ये लोग अपने से श्रेष्ठ लोगों के जीवन के लिए ही जी रहे थे।

इन दोनों वर्गों के नीचे भी अन्य लोग थे। ये चांडाल और श्वपाक थे। ये लोग मात्र अछूत ही नहीं थे, बल्कि नीच माने जाते थे। ये लोग समाज और कानून की परिधि के बाहर थे। इनके न तो कोई अधिकार थे, और न इन्हें कोई अवसर थे। ये आर्यों के समाज से बहिष्कृत थे।

आर्यों के समाज की यौन अनैतिकता जानकर उनके आज के वंशजों को सदमा पहुंचेगा। बुद्ध पूर्व के आर्यों पर यौन या वैवाहिक संबंधों के लिए आज की प्रतिबंधित श्रेणियों जैसा नियम नहीं था।

आर्य धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं। ब्रह्मा के तीन पुत्र और एक पुत्री थी। उसके एक पुत्र दक्ष ने अपनी बहन से विवाह किया। इस भाई-बहन के विवाह से जो पुत्रियां पैदा हुईं, उनमें से कुछ ने ब्रह्मा के पुत्र मारीचि के पुत्र कश्यप से विवाह कर लिया और कुछ ने ब्रह्मा के तीसरे पुत्र धर्म से विवाह कर लिया।

ऋग्वेद में एक प्रसंग है कि यम और यमी भाई-बहन थे। इस प्रसंग के अनुसार यमी अपने भाई यम को सहवास के लिए आमंत्रित करती है और उसके ऐसा करने से इंकार करने पर क्रोधित हो जाती है। ख्2,

पिता अपनी पुत्री से विवाह कर सकता था। वशिष्ठ ने अपनी पुत्री शतरूपा के वयस्क हो जाने पर उससे विवाह किया था। ख्3, मनु ने अपनी पुत्री इला से विवाह किया था। ख्4, जह्नु ने अपनी पुत्री जाह्नवी से विवाह किया था। ख्5, सूर्य ने अपनी पुत्री उषा से विवाह किया था। ख्6, बहुपति-प्रथा प्रचलित थी, जो साधारण किस्म की नहीं थी। आर्यों

  1. महाभारत, आदि पर्व, अध्याय 66

  2. ऋग्वेद,

  3. हरिवंश, अध्याय 2

  4. वही, अध्याय 10

  5. वही, अध्याय 27

  6. यास्क निरूक्त, अध्याय 5, खंड 6