26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
वे परिवार वृद्धि को ऐसा मानते थे, मानो वह प्रजनन अथवा वंश संवर्धन मात्र हो। आर्यों में लोगों का एक ऐसा वर्ग था, जिन्हें देव कहा जाता था, जो पद और पराक्रम में श्रेष्ठ मानने जाते थे। अच्छी संतानोत्पत्ति के उद्देश्य से आर्य लोग देव वर्ग के किसी भी पुरुष के साथ अपनी स्त्रियों को संभोग करने की अनुमति दे देते थे। यह प्रथा इतने व्यापक रूप से प्रचलित थी कि देव लोग आर्य स्त्रियों के साथ पूर्वास्वादन को अपना आदेशात्मक अधिकार समझने लगे। किसी भी आर्य स्त्री का उस समय तक विवाह नहीं हो सकता था, जब तक वह पूर्वास्वादन के अधिकार से तथा देवों के नियंत्रण से मुक्त नहीं कर दी जाती थी। तकनीकी भाषा में इसे ‘अवदान’ कहते थे। ‘लाज होम’ अनुष्ठान प्रत्येक हिंदू विवाह में किया जाता है, जिसका विवरण आश्वलायन गृह्य सूत्र में मिलता है। ‘लाज होम’ देवों द्वारा आर्य स्त्री को पूर्वास्वादन के अधिकार से मुक्त किए जाने का स्मृति चिन्ह है। ‘लाज होम’ में अवदान एक ऐसा अनुष्ठान है, जो देवों के वधू के ऊपर अधिकार का समापन करता है। सप्तपदी सभी हिंदू विवाहों का सबसे अनिवार्य धर्मानुष्ठान है, जिसके बिना हिंदू विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिलती। सप्तपदी का देवों के पूर्वास्वादन के अधिकार से अंगभूत संबंध है। सप्तपदी का अर्थ है, वर का वधू के साथ सात कदम चलना। यह क्यों अनिवार्य है? इसका उत्तर यह है कि यदि देव क्षतिपूर्ति से असंतुष्ट हों तो वे सातवें कदम से पहले दुल्हन पर अपना अधिकार जता सकते थे। सातवां फेरा लेने के बाद देवों का अधिकार समाप्त हो जाता था और वर, वधू को ले जाकर, दोनों पति और पत्नी की तरह रह सकते थे। इसके बाद देव कोई अड़चन नहीं डाल सकते थे और न ही छेड़खानी कर सकते थे। कुमारी के कौमार्य का कोई नियम नहीं था। कोई भी लड़की विवाह किए बिना किसी भी पुरुष के साथ संभोग कर सकती थी और उससे संतान भी उत्पन्न कर सकती थी। ‘कन्या’ शब्द के मूल अर्थ से यह स्पष्ट है। ‘कन्या’ शब्द के मूल में ‘काम’ शब्द है, जिसका अर्थ है कि लड़की स्वयं को किसी भी पुरुष के समक्ष अर्पित करने के लिए स्वतंत्र है। कुंती और मत्स्यगंधा इस बात के उदाहरण हैं कि विधिवत् विवाह किए बिना उन्होंने अपने-आपको अन्य पुरुष को अर्पित किया और बच्चे भी उत्पन्न किए। कुंती ने पांडु के साथ विवाह रचाने से पहले अलग-अलग पुरुषों के साथ संभोग किया और बच्चे पैदा किए। मत्स्यगंधा ने भीष्म के पिता शांतनु से विवाह रचाने से पहले पराशर ऋषि के साथ संभोग किया।
पशुओं के साथ यौनाचार करना भी आर्यों में प्रचलित था। ऋषि किंदम द्वारा हिरणी के साथ मैथुन किए जाने की कहानी सर्वविदित है। ख्1, एक दूसरा उदाहरण सूर्य द्वारा घोड़ी के साथ मैथुन किए जाने का है। ख्2, लेकिन सबसे वीभत्स उदाहरण स्त्री द्वारा अश्वमेघ यज्ञ में घोड़े के साथ मैथुन किए जाने का है।
महाभारत, अध्याय 1-118
वही, 66