4. सुधारक और उनकी नियति - Page 47

32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. एक गैर-धर्मांतरित व्यक्ति तथागत की सराहना करते हुए केवल छोटी-छोटी चीजों, महत्वहीन बातों और मात्र नैतिकता के बारे में बोलेगा। ऐसी छोटी-छोटी चीजें और मात्र नैतिकता के अल्प ब्यौरे क्या हैं, जिनकी वह सराहना करेगा?

(4) (नैतिकता, भाग I )

  1. ‘प्राणियों की हत्या को अस्वीकार करते हुए, परिव्राजक गौतम जीवन के विनाश से अलग रहते हैं। उन्होंने गदा और तलवार अलग रख दी है, और कठोरता से लज्जित तथा दया से परिपूर्ण, वह सभी जीवनधारियों के प्रति संवेदनशील एवं दयालु रहते हैं।’ तथागत की सराहना में बोलते हुए, गैर-धर्मांतरित व्यक्ति इसी प्रकार बोल सकता है।

अथवा वह कह सकता हैः ‘जो नहीं दिया गया है, उसको अस्वीकार करते हुए परिव्राजक गौतम उसे ग्रहण करने से अलग रहे जो उनका अपना नहीं है। वह केवल वही लेते हैं जो दिया जाता है, और इस आशा में कि भेंट और आएगी, वह अपना जीवन ईमानदारी तथा हृदय की पवित्रता के साथ व्यतीत करते हैं।’

अथवा वह कह सकता है, ‘अशुचिता का परित्याग करते हुए परिव्राजक गौतम ब्रह्मचारी हैं। यह यौनाचार की अश्लील प्रथा से स्वयं को अलग और कोसों दूर रखते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘मिथ्याभाषण का परित्याग करते हुए परिव्राजक गौतम अपने-आपको झूठ से अलग रखते हैं। वह सत्य बोलते हैं और सत्य से कभी डिगते नहीं। वह निष्ठावान और विश्वास योग्य हैं तथा विश्व को दिया गया अपना वचन भंग नहीं करते।’

अथवा वह कह सकता हैः ‘निंदापूर्ण बातों को अस्वीकार करते हुए परिव्राजक गौतम पर-निंदा से दूर रहते हैं। वह जो-कुछ यहां सुनते हैं, उसे यहां से लोगों के बीच विवाद उत्पन्न करने के लिए अन्यत्र दोहराते नहीं हैं, अन्यत्र को- कुछ सुनते हैं, उसे वहां के लोगों के विरूद्ध विवाद उठाने के लिए नहीं दोहराते हैं। इस तरह वह बंटे हुए लोगों को एकजुट करने के लिए जीवनयापन करते हैं, वह मित्रों को प्रोत्साहन देने वाले, शांति स्थापित करने वाले, शांति पे्रमी, शांति के लिए भावपूर्ण और शांतिवर्धक शब्दों के वक्ता हैं।’

अथवा वह कह सकता हैः ‘अविनयपूर्ण वाणी का परित्याग करते हुए, परिव्राजक गौतम कठोर भाषा का प्रयोग नहीं करते। वह ऐसे शब्द बोलते हैं, जो निर्दोष, कर्ण-प्रिय, मधुर, हृदय-स्पर्शी, सुसंस्कृत, आनंददायक और लोकप्रिय हो।’

अथवा वह कह सकता हैः निरर्थक बातों का परित्याग करते हुए परिव्राजक गौतम व्यर्थ की बातचीत नहीं करते। विशेष अवसर पर वह धर्म तथा संघ के अनुशासन के विषय पर तथ्यानुसार बोलते हैं, उनके शब्द सार्थक होते हैं। वह सही समय पर ऐसे शब्द बोलते हैं, जो उपयुक्त उदाहरणों से युक्त, सुस्पष्ट और प्रासंगिक किसी के भी हृदय में बस जाने योग्य होते हैं।’