4. सुधारक और उनकी नियति - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अथवा ग्रंथियों अथवा कोपलों अथवा बीजों से होता है, परिव्राजक गौतम नवपादपों और बढ़ते हुए पौधों को इस प्रकार की हानि पहुंचाने से दूर रहते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण जिस प्रकार खाद्य, पेय, वस्त्र, साज-सामान, बिस्तरे, इत्र और कढ़ी हुई सामग्री जैसी एकत्रित वस्तुओं के उपयोग के अभ्यस्त हो जाते हैं, परिव्राजक गौतम एकत्रित की गई ऐसी वस्तुओं के उपयोग से दूर रहते हैं।’

  2. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले परिव्राजक और ब्राह्मण ऐसे तमाशों में जाने के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेः

  3. नाच-नृत्य (नक्काम),

  4. गीत-गायन (गीतम),

  5. वाद्य संगीत (वादितम),

  6. मेलों में तमाशे (पेखम),

  7. गाथाओं का पाठ (आक्खानम),

  8. कर संगीत (पाणिसरम),

  9. चारणों का गान (वेताल),

  10. टम-टम वाद्य (कुंभाथुनम),

  11. सुंदर दृश्य (शोभा नगरकम्),

  12. चांडालों द्वारा नटीय करतब (चांडाल वमसा-धोपनम),

  13. हाथियों, घोड़ों, भैंसों-सांडों, बकरियों, भेड़ों, मुर्गों और बटेरों की लड़ाई,

  14. लठैती, मुक्केबाजी, मल्ल में शक्ति परीक्षण,

13-16. दिखावटी लड़ाई, हाजिरी लेना, युद्धाभ्यास, समीक्षा।

परिव्राजक गौतम ऐसे तमाशों में जाने से स्वयं को दूर रखते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक अथवा ब्राह्मण ऐसे खेलों और मनोरंजनों के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेः

(1) आठ या दस चौखानों से बनी बिसात (चौपड़),

(2) हवा में ऐसी बिसात की कल्पना करते हुए उसी प्रकार के खेलों का खेला जाना,