सुधारक और उनकी नियति
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(3) जमीन पर खींची गई लकीरों के ऊपर चलते रहना जिससे प्रत्येक अपने अपेक्षित
स्थान पर कदम रख सके,
(4) एक ढेरी में से नाखूनों के बल पर बिना हिलाए मोहरों अथवा मनुष्यों को हटाना,
अथवा उन्हें ढेरी में रखना जिससे ढेरी हिल जाती है, वह हार जाता है, (5) पांसा फेंकना,
(6) लंबी छड़ी से छोटी छड़ी पर प्रहार करना,
(7) लाख अथवा लाल रंग अथवा आटे के पानी में सनी, अंगुलियों वाले हाथ को
पानी में डुबोना और गीले हाथ को जमीन अथवा दीवार पर मारना, पुकार कर
कहना कि ‘यह क्या होगा?’ और दिखाना कि यह शक्ल हाथी, घोड़ों आदि
की होनी चाहिए,
(8) गेंद से खेल खेलना,
(9) पत्तों की बनी हुई खिलौन की बांसुरी बजाना,
(10) खिलौने के हलों से हल चलाना,
(11) कलाबाजियां दिखाना,
(12) ताड़ के पत्तों की खिलौना चक्की बनाकर खेलना,
(13) ताड़ के पत्तों का खिलौना माप बनाकर खेलना,
(14-15) खिलौना गाडि़यों अथवा खिलौना धनुषों से खेलना,
(16) हवा में अथवा साथी खिलाड़ी की पीठ पर लिखे अक्षरों का पूर्वानुमान
लगाना,
(17) साथी खिलाड़ी के विचारों का पूर्वानुमान लगाना, और
(18) बहरूपियापन।
परिव्राजक गौतम इस प्रकार के खेलों और मनोरंजनों से अलग रहते हैं।’
- अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण ऊंचे और विशाल पलंगों के उपयोग के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेःµ
(1) सचल पीठिकाएं, ऊंची और छह फुट लंबी (असंदी),
(2) तख्त जिसकी पीठ पर पशु आकृतियां खुदी हों (पल्लंको),
(3) बकरी के लोमो वाली लंबी चादर (गोनाको),
(4) रंगीन थेगली से बनाए गए पलंगपोश (कित्तका),
(5) सफेद कंबल (पट्टिका),
(6) ऊनी शैयावरण जिनमें फुलों की कढ़ाई की गई हो (पटालिका),